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मुआवजा नहीं,तो गाड़ी की कुर्क

48 लाख मुआवजा नहीं चुकाने पर पुलिस विभाग की दूसरी गाड़ी कुर्क, कोर्ट ने बोलेरो भी कराई जब्त

48 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान नहीं होने पर अदालत के आदेश पर पुलिस विभाग की दूसरी गाड़ी, एक बोलेरो, भी कुर्क कर ली गई।

48 लाख मुआवजा नहीं चुकाने पर पुलिस विभाग की दूसरी गाड़ी कुर्क कोर्ट ने बोलेरो भी कराई जब्त

Court Seizes Another Police Vehicle Over Non-Payment of ₹48 Lakh Compensation |

बलरामपुर,(छत्तीसगढ़)। न्यायालय के आदेश के बावजूद मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में स्वीकृत लगभग 48 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर पुलिस विभाग को लगातार दूसरी बार कुर्की की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। जिला मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) रामानुजगंज के आदेश पर इस बार थाना रामानुजगंज की बोलेरो वाहन क्रमांक CG 03-0038 को जब्त कर न्यायालय परिसर में खड़ा करा दिया गया।

ब्याज सहित लगभग 48 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि अदा करने के निर्देश

इससे पहले कैदियों के परिवहन में प्रयुक्त पुलिस के डग्गा वाहन को भी कुर्क किया जा चुका है। मामला एमएसी क्रमांक 154/2021 से जुड़ा है। इस प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय ने 3 सितंबर 2025 को नारायण यादव एवं अन्य के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग को ब्याज सहित लगभग 48 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि अदा करने का निर्देश दिया था।

आदेश के बावजूद नही किया गया राशि का भुगतान

आदेश के बावजूद राशि का भुगतान नहीं होने पर पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.के. पटेल ने जिला मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में निष्पादन याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने सबसे पहले पुलिस के कैदी वाहन की कुर्की के आदेश दिए थे। भुगतान नहीं होने की स्थिति में अब दूसरी कार्रवाई करते हुए थाना रामानुजगंज की बोलेरो को भी जब्त कर न्यायालय परिसर में खड़ा करा दिया गया है।

आने वाले दिनों में की जाएगी अन्य वाहनों की कुर्की

सूत्रों का कहना है, कि निष्पादन याचिका में पुलिस विभाग के अन्य वाहनों का भी उल्लेख किया गया है। यदि शासन द्वारा शीघ्र क्षतिपूर्ति राशि जमा नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में अन्य वाहनों की कुर्की की कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकारी विभाग के वाहनों पर लगातार हो रही कुर्की की कार्रवाई ने प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ा दी है। साथ ही यह मामला न्यायालय के आदेशों के समयबद्ध पालन और सरकारी जवाबदेही को लेकर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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