डूंगरपुर के गेंजी गांव में जर्जर विद्यालय भवन के कारण छात्राओं को अस्थायी टीन शेड में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
Dilapidated School Building in Dungarpur Puts Students at Risk, Girls Forced to Study Under Tin Shed |
डूंगरपुर,(राजस्थान)। जिले के गेंजी गांव से शिक्षा के मंदिर की एक बेहद चिंताजनक और डराने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां स्थित महात्मा गांधी उच्च माध्यमिक बालिका विद्यालय का भवन इस कदर जर्जर हो चुका है कि वह कभी भी जमींदोज हो सकता है। स्कूल की खस्ताहाल हो चुकी छतों और दीवारों के चलते यहां पढ़ने वाली छात्राओं और स्टाफ के सिर पर हर वक्त डर व मौत का साया मंडराता रहता है। अभिभावकों व ग्रामीणों में इस अव्यवस्था को लेकर गहरा आक्रोश और चिंता व्याप्त है।
टीन शेड में भविष्य गढ़ने को मजबूर बेटियां
प्रशासनिक अनदेखी की हद यह है कि भवन की खतरनाक स्थिति को देखते हुए छात्राओं को विद्यालय परिसर के बाहर अस्थायी तौर पर बनाए गए टीन शेड में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा, संसाधनों की कमी का आलम यह है कि पहली से लेकर सातवीं कक्षा तक के मासूम नौनिहालों को एक ही कमरे में भेड़-बकरियों की तरह बैठकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। केवल कक्षा-कक्ष ही नहीं, बल्कि विद्यालय की प्रधानाचार्य का कार्यालय भी पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जिससे स्टाफ की सुरक्षा भी दांव पर लगी है। दूर-दराज से अपनी बेटियों को बेहतर भविष्य के लिए भेजने वाले अभिभावक अब इस बात से डरे हुए हैं कि यदि पढ़ाई के दौरान कोई हादसा हो गया, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
ग्रामीणों ने नए भवन के लिए सांसद से की वार्ता
इस गंभीर और संवेदनशील मामले को लेकर बुधवार को क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने समाजसेवी अनिल जैन के नेतृत्व में विद्यालय का धरातलीय निरीक्षण किया। भवन की भयावह हकीकत देखने के बाद ग्रामीणों ने तुरंत ही संबंधित उच्च अधिकारियों और क्षेत्र के सांसद राजकुमार रोत से दूरभाष पर चर्चा की। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए स्कूल भवन के शीघ्र पुनर्निर्माण और वैकल्पिक व्यवस्था करने की पुरजोर मांग की।
प्रशासन चेते, वरना आंदोलन की चेतावनी
निरीक्षण के दौरान राजेंद्र कुमार लखारा, युवा नेता हितेश कलाल, जीवा भाई यादव और वार्ड पंच भंवर लाल कटारा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और अभिभावक उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
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