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सोनभद्र बिजली परियोजनाओं पर हाईकोर्ट सख्त, नियमों की अनदेखी पर केंद्र व राज्य को नोटिस

सोनभद्र जिले में बिजली की 17000 मेगावाट की परियोजनाओं में पर्यावरण नियमों की अनदेखी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

सोनभद्र बिजली परियोजनाओं पर हाईकोर्ट सख्त नियमों की अनदेखी पर केंद्र व राज्य को नोटिस

फाइल फोटो |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में बिजली की 17000 मेगावाट की परियोजनाओं में पर्यावरण नियमों की अनदेखी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने केंद्र और राज्य से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोनभद्र जिले की 17000 मेगावाट की परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने इस मामले में दायर याचिका पर केंद्र, राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब मांगा है।

जंगल कटान और पर्यावरण मंजूरी के उल्लंघन का मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के सोनभद्र जिले में प्रस्तावित और चालू बिजली परियोजनाओं में पर्यावरण नियमों की अनदेखी के मामले में केंद्र, राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है। यह मामला मुख्य रूप से सोनभद्र के घने जंगलों को काटकर बनाई जा रही बड़ी परियोजनाओं (विशेष रूप से 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की पंप स्टोरेज परियोजना) में पर्यावरणीय मंजूरी के कथित उल्लंघन से संबंधित है।

याचिका पर सुनवाई के बाद अगली तारीख 28 मार्च तय

खंडपीठ ने गुप्तकाशी सेवा ट्रस्ट के प्रधान ट्रस्टी रवि प्रकाश चौबे और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के संबंधित प्राधिकारियों से पर्यावरणीय अनुमति का ब्योरा तलब किया है। साथ ही पीठ ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी अपना जवाब पेश करने का निर्देश देकर अगली सुनवाई 28 मार्च को नियत की है।

ऊर्जा हब बनाने की योजना पर पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता

सोनभद्र को 'ऊर्जा हब' बनाने के लिए सरकार द्वारा 2030-32 तक क्षमता बढ़ाने के लिए कई परियोजनाएं मंजूर की गई थीं। इस परियोजना में लाखों पेड़ काटने की योजना थी। विशेषज्ञों ने चेताया है कि सोनभद्र, जो पहले से ही भारत के सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है, इन नई परियोजनाओं से वहां की पारिस्थितिकी, जलस्रोत (ऊपरी खजुरी जलस्रोत) और वन्यजीव पूरी तरह नष्ट हो सकते हैं। स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों द्वारा इन परियोजनाओं के कारण होने वाले वनों के विनाश की शिकायत और आंदोलन के बाद अक्टूबर 2025 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सोनभद्र के ओबरा वन प्रभाग में 17,000 करोड़ रुपये की 616 हेक्टेयर जंगल वाली पंप स्टोरेज परियोजना को रोक दिया था। पर इस परियोजना को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है।

याचिका में विस्तृत पर्यावरणीय अध्ययन और जनसुनवाई की मांग

याची की अधिवक्ता अभिलाषा पांडेय ने बताया कि याचिका में न्यायपालिका की देख रेख में विस्तृत पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने और जनसुनवाई का अनुरोध किया गया है। नगवा और तरिया क्षेत्र के प्राकृतिक सघन वनों के बैजनाथ क्षेत्र में 3600, सोमा में 2400, ससनाई में 1750, चिचलिक में 1560, झरिया में 1620 और पनौरा और बसुवारी में 1500 मेगावाट की जल विद्युत परियोजनाओं से संबंधित है।

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