सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने जमानत व्यवस्था पर अपनी राय रखते हुए कहा कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया कई बार दोषसिद्धि से पहले ही सजा जैसी बन जाती है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत न मिलने पर कहा कि देश में सज़ा मिलने या बरी होने से पहले का समय एक सज़ा बन गया है। उन्होंने कहा कि इतनी लंबी प्रक्रिया सज़ा बन जाती है, और कहा कि ऐसे मामलों में ज़मानत एक आम बात होनी चाहिए। ANI के साथ एक इंटरव्यू में कौल ने कहा कि भले ही वह ज़मानत पर बहुत उदार सोच रखते हैं, लेकिन कुछ कानून कुछ मामलों में ज़मानत पर साफ़ तौर पर रोक लगाते हैं।
जमानत सामान्य नियम होनी चाहिए: जस्टिस कौल
उन्होंने कहा, मैंने ज़मानत पर आम तौर पर बहुत उदार सोच रखी है। मुझे लगता है कि ज़मानत सज़ा नहीं हो सकती। सज़ा ही सज़ा है। हमारे सिस्टम में दुर्भाग्य से सज़ा मिलने या बरी होने से पहले का समय ही सज़ा बन जाता है। प्रक्रिया ही सज़ा बन जाती है। कई जज इस बारे में लिख रहे हैं और बात कर रहे हैं। असल में मैंने जस्टिस सुंदरेश के साथ बैठकर बेल पर ही डिटेल में बात की थी, यह कहने की कोशिश की थी कि आप लोग कस्टडी में क्यों हैं? जस्टिस सुंदरेश ने जजमेंट लिखा। मेरे हिसाब से वह इस मामले में एक लिबरल जज हैं। हमने नॉर्म्स वगैरह तय करने की कोशिश की, जो पहले से मौजूद थे, लेकिन आप जानते हैं, इस केस तक कोशिश कर रहे थे। इसलिए ज़्यादातर मामलों में हमारा मानना है कि बेल नॉर्म होना चाहिए, लेकिन कुछ ऐसे एक्ट हैं जो बेल पर रोक लगाते हैं।
31 अक्टूबर को रिलीज होगी जस्टिस संजय किशन कौल की किताब
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने जय विनायक ओझा के साथ मिलकर "विदाउट फियर ऑर फेवर" नाम से एक आने वाली मेमॉयर लिखी है, जो 31 अक्टूबर को रिलीज़ होने वाली है। प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक, खालिद और इमाम पर फरवरी 2020 के नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साज़िश के सिलसिले में UAPA के तहत आरोप हैं, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और 700 से ज़्यादा घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता (संशोधन) एक्ट, 2019 और प्रस्तावित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।
उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 5 जनवरी को उमर खालिद और शरजील इमाम को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साज़िश से जुड़े एक मामले में ज़मानत देने से मना कर दिया था। अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम प्रॉसिक्यूशन और सबूत दोनों के मामले में अलग-अलग पायदान पर हैं। हाल ही में सितंबर में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। यह मामला दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साज़िश से संबंधित FIR 59/2020 में दर्ज किया गया था।
(इनपुट: ANI)
ये भी पढ़ें- न्यायपालिका और सरकार के बीच अधिकारों की खींचतान पर बोले जस्टिस कौल, कॉलेजियम सिस्टम पर भी की चर्चा