केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों का 'चिता आंदोलन' मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर पन्ना -छतरपुर बार्डर पर स्थित कुपी गांव के नजदीक बाराना नदी मे 8 दिन बाद भी जारी है।
छतरपुर (मध्यप्रदेश)। केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों का 'चिता आंदोलन' मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर पन्ना -छतरपुर बार्डर पर स्थित कुपी गांव के नजदीक बाराना नदी मे 8 दिन बाद भी जारी है। आंदोलन का दायरा अब और बढ़ गया है। मिट्टी और जल सत्याग्रह के साथ आज शनिवार से 'फांसी सत्याग्रह' भी शुरू कर दिया गया है।
8 दिन बाद जागा पन्ना-छतरपुर प्रशासन
आंदोलन शुरू होने के 8 दिन बाद आखिरकार पन्ना और छतरपुर जिला प्रशासन के अधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंचे। पन्ना जिले के मझगांय, रूंझ, नेगुवा और अन्य गांवों के प्रभावित परिवार पिछले 8 दिनों से मुआवजे और भ्रष्टाचार की जांच की मांग कर रहे हैं। आज आंदोलनकारियों ने मिट्टी सत्याग्रह का चौथा और जल सत्याग्रह का तीसरा दिन मनाया। ग्रामीणों ने सरकार को चेतावनी देने के लिए 'फांसी सत्याग्रह' भी शुरू किया गया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर का आमरण अनशन आज 5वें दिन में है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि 5 दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने उनका मेडिकल टेस्ट तक नहीं कराया है।
पूर्ण मुआवजे और भ्रष्टाचार की जांच पर अड़े ग्रामीण
प्रशासन से बातचीत में अमित भटनागर ने कहा कि जिन लोगों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला, उनकी जमीन और मकान सरकार कैसे अधिग्रहित कर सकती है। अमित भटनागर ने कहा कि भू-अर्जन कानून 2013 की धारा 38(1) और 38(2) साफ कहती है कि जब तक प्रभावित व्यक्ति को पूर्ण मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक जमीन का अधिग्रहण नहीं हो सकता। प्रशासन खुद कानून तोड़ रहा है। अगर सरकार ही कानून नहीं मानेगी तो जनता न्याय के लिए कहां जाएगी। आंदोलनकारियों ने प्रशासन की संवेदनहीनता पर गहरी नाराजगी जताई है। उनकी मांग है कि सभी प्रभावितों को उचित मुआवजा मिले और कथित भ्रष्टाचार की उच्च-स्तरीय जांच हो। आंदोलनकारियों ने साफ कहा है कि जब तक मांगे पूरी नहीं होतीं, सत्याग्रह और तेज किया जाएगा।
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