राम मंदिर निर्माण समिति कि प्रस्तावित सीईओ ट्रस्ट के अधीन प्रशासनिक प्रबंधन का कार्य संभालेंगे और उन्हें मिलने वाले अधिकारों का निर्धारण ट्रस्ट करेगा।
अयोध्या,(उत्तर प्रदेश)। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की प्रक्रिया के बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि सीईओ की भूमिका प्रशासनिक प्रबंधन तक सीमित होगी और वह ट्रस्ट के अधीन रहकर कार्य करेंगे।
मंदिर के प्रशासन को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं और एसआईटी जांच के बीच सीईओ की नियुक्ति को मंदिर के प्रशासन को अधिक व्यवस्थित, पेशेवर और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पत्रकारों से बातचीत में नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रबंधन प्रमुख के रूप में कार्य करेंगे, लेकिन उन्हें मिलने वाले अधिकार पूरी तरह ट्रस्ट तय करेगा।
किसी भी बदलाव का निर्णय ट्रस्ट के नियमों के अनुरूप
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट जिन शक्तियों का हस्तांतरण करेगा, उसी के आधार पर सीईओ अपने कर्मचारियों और प्रशासनिक कार्यों का संचालन करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उप-समितियों या प्रशासनिक व्यवस्था में होने वाले किसी भी बदलाव का निर्णय ट्रस्ट के नियमों के अनुरूप ही लिया जाएगा।
मीडिया से जिम्मेदारीपूर्ण रिपोर्टिंग की अपील
सीईओ के चयन को लेकर पूछे गए सवाल पर मिश्रा ने कहा कि वह चयन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं। उनके अनुसार, इस पद के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति उम्मीदवारों का चयन करेगी और वह स्वयं उस समिति के सदस्य नहीं हैं। राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या घटने संबंधी खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए मिश्रा ने मीडिया से जिम्मेदारीपूर्ण रिपोर्टिंग की अपील की। उन्होंने कहा कि अफवाहों से बचने के लिए तथ्यात्मक जानकारी सामने आना जरूरी है। उनका दावा था कि मंदिर आने वाले श्रद्धालु व्यवस्थाओं, पूजा-अर्चना और आरती को लेकर संतुष्ट हैं और अधिकांश श्रद्धालु मंदिर के अनुभव की सराहना करते हैं।
बैठक के एजेंडे का अध्ययन करने के बाद निर्णय
22 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट बैठक में अपनी मौजूदगी को लेकर उन्होंने कहा कि वह बैठक के एजेंडे का अध्ययन करने के बाद ही निर्णय लेंगे। यदि बैठक में निर्माण कार्य से जुड़े विषय शामिल होंगे, तो वह निश्चित रूप से उसमें भाग लेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि पदेन निदेशक होने के नाते उन्हें मतदान का अधिकार नहीं है और उनकी भूमिका केवल संबंधित विषयों पर सुझाव देने तक सीमित है।
उम्मीदवार का स्नातक होना आवश्यक
इस बीच, सीईओ की नियुक्ति के लिए गठित समिति ने पात्रता मानदंड तय कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवार का स्नातक होना आवश्यक है तथा प्रशासन या वित्त क्षेत्र में कम से कम 20 वर्षों का अनुभव होना चाहिए। मंदिर प्रबंधन का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी और आवेदक का हिंदू धर्म का अनुयायी होना भी अनिवार्य होगा।
सीईओ पद के लिए आवेदन 18 जुलाई तक स्वीकार
सीईओ पद के लिए आवेदन 18 जुलाई तक स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए एक विशेष ईमेल आईडी बनाई जा रही है। आवेदन प्राप्त होने के बाद समिति चयनित उम्मीदवारों के साथ बातचीत करेगी और अंतिम चयन करेगी। नियुक्ति प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के लिए होगी तथा चयनित अधिकारी को अयोध्या में रहकर कार्य करना होगा। समिति ने चयन प्रक्रिया के संचालन के लिए एक सचिव नियुक्त करने का भी निर्णय लिया है और अगले एक महीने के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। उधर, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय 13 जुलाई को सुनवाई करेगा। (एएनआई)
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