मध्य प्रदेश के मंडला जिला में नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का लोकार्पण किया गया है, जिससे ग्रामीण लोगों को इलाज लेने में आसानी होगी.
मंडला: मध्य प्रदेश के मंडला जिला के दूरस्थ आदिवासी अंचल ककैया में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया। लगभग 1 करोड़ 59 लाख रुपये की लागत से निर्मित नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का लोकार्पण सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, क्षेत्रीय विधायक नारायण सिंह पट्टा एवं जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुशराम ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों ने भवन का फीता काटकर शुभारंभ किया. उन्होंने इसे इस क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए मील का पत्थर बताया।
स्वास्थ्य केंद्र बनने से आसपास के लोगों को मिलेगा लाभ
इस नए स्वास्थ्य केंद्र के शुरू होने से ककैया सहित आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। अब स्थानीय स्तर पर ही सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने की उम्मीद बढ़ गई है, जिससे समय पर इलाज मिलने के साथ मरीजों की परेशानी भी कम होगी।
चिकित्सा सेवाओं का किया जाएगा और विस्तार
लोकार्पण समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के साथ-साथ आने वाले समय में चिकित्सा सेवाओं का और विस्तार किया जाएगा।
आवश्यक संसाधन और सुविधाएं भी की जाएंगी विकसित
वहीं क्षेत्रीय विधायक नारायण सिंह पट्टा ने कहा कि नए स्वास्थ्य केंद्र के संचालन से क्षेत्र के लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध होगा और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनता की आवश्यकता के अनुरूप यहां आवश्यक संसाधन और सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, दवाइयों और आवश्यक उपकरणों की अभी भी है कमी
हालांकि भवन का निर्माण और लोकार्पण ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है। मंडला जिले में कई ऐसे स्वास्थ्य केंद्र पहले से मौजूद हैं, जहां करोड़ों रुपये खर्च कर भवन तो बना दिए गए, लेकिन डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, दवाइयों और आवश्यक उपकरणों की कमी के कारण वे पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो सके।
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