सुप्रीम कोर्ट अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर 13 जुलाई को सुनवाई करेगा।
अयोध्या (उत्तर प्रदेश): सुप्रीम कोर्ट अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर 13 जुलाई को सुनवाई करेगा। ये याचिकाएं भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।
VIP दर्शन पास को लेकर ट्रस्ट सदस्य का बयान
इस बीच, श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज ने उन खबरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि ट्रस्ट ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के वीआईपी दर्शन पास आईडी ब्लॉक कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंपत राय की आईडी का उपयोग करके ही पास जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "अभी तक कोई समस्या नहीं है। यह व्यवस्था अभी भी लागू है। मेरे पास इसके अलावा कोई और जानकारी नहीं है; मौजूदा व्यवस्था अभी भी जारी है।"
पुलिस और प्रशासन पर जताया भरोसा
इससे पहले गुरुवार को महंत दिनेंद्र दास ने उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन पर पूरा भरोसा जताया। उनका यह बयान तब आया, जब अयोध्या पुलिस ने इस मामले के तीन मुख्य आरोपियों में से एक अनुकल्प मिश्रा से हिरासत में पूछताछ शुरू की। एएनआई से बातचीत में उन्होंने दान की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर उठ रही चिंताओं को खारिज करते हुए कहा, "हमें राम लल्ला पर पूरा भरोसा है और मुख्यमंत्री एवं प्रशासन इस मामले से पूरी तरह अवगत और जुड़े हुए हैं। हमें पुलिस पर पूरा भरोसा है। वे अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। वे हर हाल में चोरों को पकड़ेंगे और उन्हें सजा भी देंगे।"
SIT जांच में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
कथित गबन के मामले ने उत्तर प्रदेश में राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) इस मामले की जांच कर रहा है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच में अयोध्या स्थित राम मंदिर के मतगणना कक्ष में सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक की ओर इशारा किया गया है। जांच के अनुसार, कर्मचारियों ने कथित तौर पर नकदी के बंडल अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और अन्य निजी सामानों में छिपाए थे। एसआईटी का कहना है कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं थीं, बल्कि कथित तौर पर व्यवस्थित और बार-बार की गईं।
CCTV फुटेज में 70 संदिग्ध घटनाएं
एसआईटी के मुताबिक, 27 अप्रैल से 5 जून के बीच की सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा में मतगणना कर्मचारियों द्वारा नकदी के बंडल छिपाने की करीब 70 संदिग्ध घटनाएं सामने आई हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया कि मतगणना हॉल के प्रवेश और निकास पर कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली जाती थी और उनके निजी सामान की भी पर्याप्त निगरानी नहीं की गई।
विपक्ष ने उठाए सवाल, सीएम योगी ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं ने राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरोसा दिलाया है कि मंदिर के लिए आवंटित धन के दुरुपयोग का दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
(एएनआई)
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