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बद्रीनाथ में प्रसाद चढ़ाने को लेकर विवाद

बद्रीनाथ धाम चढ़ावा घोटाला: SIT ने मंदिर प्रशासन पर कसा शिकंजा, CCTV जांच में 'इनसाइडर नेटवर्क' के संकेत

देवभूमि उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में आस्था के साथ खिलवाड़ और चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपों ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

बद्रीनाथ धाम चढ़ावा घोटाला sit ने मंदिर प्रशासन पर कसा शिकंजा cctv जांच में इनसाइडर नेटवर्क के संकेत

Special Investigation Team (SIT) at Badrinath temple |

देहरादून (उत्तराखंड)। देवभूमि उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में आस्था के साथ खिलवाड़ और चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपों ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय विशेष जांच टीम (SIT) ने मंदिर पहुंचकर सीधे प्रशासनिक अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस कार्रवाई से मंदिर प्रशासन में खलबली मच गई है और इस महा-घोटाले की परतें तेजी से खुलने लगी हैं।

प्रशासनिक कोर और सुपरविजन पर उठे गंभीर सवाल

गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप के नेतृत्व में पहुंची SIT टीम में वरिष्ठ वित्त और प्रबंधन अधिकारी शामिल हैं। टीम ने धाम पहुंचते ही सबसे पहले मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को निशाने पर लिया। मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ और उनके पीए अतुल डिमरी से सुपरविजन में हुई गंभीर प्रशासनिक चूक को लेकर तीखे सवाल पूछे गए। जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि इतने संवेदनशील स्थान पर लंबे समय से चल रही वित्तीय अनियमितताओं को आखिर उच्च स्तर पर नजरअंदाज क्यों और कैसे किया गया।

CCTV कंट्रोल रूम में डेरा और 'मनी ट्रेल' की तलाश

प्रशासनिक और वित्तीय गड़बड़ियों की गहराई नापने के लिए जांच अधिकारी खुद मंदिर के सीसीटीवी कंट्रोल रूम में डटे हुए हैं। यहां रोजाना आने वाले चढ़ावे को संभालने, गिनने और उसके रख-रखाव के पूरे ऑपरेशनल लॉग बुक की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। जांच का मुख्य केंद्र बिंदु यह है कि दान में मिली राशि को तिजोरी तक पहुंचाने की तय सुरक्षा प्रक्रिया में कहां और किस स्तर पर सेंध लगाई गई।

न्यायिक शिकंजा और बड़े नेक्सस की आशंका

इस पूरे मामले में आपराधिक जांच भी समानांतर रूप से तेज हो गई है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को गोपेश्वर की जिला एवं सत्र अदालत से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में सीधे पुरसाड़ी जिला जेल भेज दिया है। पुलिस अब इस बात की कड़ियों को जोड़ रही है कि क्या प्रमोद इस पूरे खेल का एकमात्र मोहरा था या इसके पीछे कोई बहुत बड़ा संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है।

'इनसाइडर नेटवर्क' की आहट से हड़कंप

पुलिस की तफ्तीश में सबसे चौंकाने वाला मोड़ 25 जून के सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा से आया है। करेंसी-काउंटिंग रूम (चढ़ावा गिनने का कमरा) के इस फुटेज में BKTC के कुछ अन्य कर्मचारी भी बेहद संदिग्ध हरकतें करते नजर आ रहे हैं। पुलिस ने इन संदिग्ध वीडियो रील्स को कानूनी रूप से जब्त कर लिया है और इन कर्मचारियों को भी सक्रिय निगरानी (Active Scrutiny) पर रख दिया है। अंदेशा जताया जा रहा है कि यह मंदिर के भीतर सक्रिय एक बड़ा 'इनसाइडर नेटवर्क' हो सकता है जो सीधे मनी ट्रेल से जुड़ा है।

प्रभाव विश्लेषण (Impact Analysis) और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: बद्रीनाथ धाम में इस वित्तीय अनियमितता के खुलासे का श्रद्धालुओं और मंदिर की साख पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: बद्रीनाथ धाम करोड़ों सनातनियों की अटूट आस्था का केंद्र है। चढ़ावे में हेराफेरी और मंदिर समिति के ही कर्मचारियों की संदिग्ध संलिप्तता से मंदिर की वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इस जांच के बाद मंदिर में दान प्रबंधन, सुरक्षा ऑडिट और सीसीटीवी सर्विलांस के नियमों को बेहद कड़ा किया जा सकता है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बहाल किया जा सके।

प्रश्न 2: 'इनसाइडर नेटवर्क' के खुलासे के बाद पुलिस और BKTC के सामने क्या बड़ी चुनौतियां हैं?
उत्तर: पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती उस पूरे 'मनी ट्रेल' (पैसे के अवैध लेन-देन के रास्ते) को ट्रैक करना है जो इस रैकेट के पीछे काम कर रहा था। यदि मंदिर के अन्य कर्मचारी भी इस सांठगांठ में शामिल पाए जाते हैं, तो पूरे प्रशासनिक ढांचे में बड़े फेरबदल और नए कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने होंगे ताकि भविष्य में ऐसी सेंधमारी रोकी जा सके।
​(भाषांतर: Ravi Pandey | इनपुट: ANI)

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