उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर देश के डिजिटल गवर्नेंस और शिक्षा के आधुनिकीकरण में अपनी बादशाहत साबित की है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर देश के डिजिटल गवर्नेंस और शिक्षा के आधुनिकीकरण में अपनी बादशाहत साबित की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'डिजिटल यूपी' विज़न के तहत, राज्य ने 'डिजिटल इंडिया' अभियान के अंतर्गत अपार (Automated Permanent Academic Account Registry - APAAR) आईडी निर्माण में स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा, दोनों ही श्रेणियों में देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया है। सरकार का यह कदम प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
कैसे उत्तर प्रदेश ने देश को पीछे छोड़ा: आंकड़ों की जुबानी
उच्च शिक्षा में रिकॉर्ड बढ़त: उत्तर प्रदेश ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में रिकॉर्ड 73,20,603 अपार आईडी बनाकर देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इस सूची में महाराष्ट्र (55,52,064) दूसरे और राजस्थान (42,16,422) तीसरे पायदान पर है। स्कूल शिक्षा में भी नंबर वन: स्कूली स्तर पर भी यूपी ने 2,95,90,359 अपार आईडी तैयार कर देश के सभी राज्यों को पछाड़ दिया है। यहाँ भी महाराष्ट्र (2,09,53,061) दूसरे और बिहार (1,58,86,050) तीसरे स्थान पर रहकर यूपी से काफी पीछे हैं।
क्या है अपार आईडी और इसके फायदे: अपार आईडी प्रत्येक छात्र के लिए एक स्थायी डिजिटल अकादमिक पहचान है। इसके माध्यम से छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहते हैं, जिससे स्कूल बदलने, उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने, छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) और भविष्य में रोजगार संबंधी प्रक्रियाओं में बड़ी आसानी होगी।
एकमुश्त एकीकरण का लक्ष्य: योगी सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के प्रत्येक विद्यार्थी को एक स्थायी डिजिटल अकादमिक पहचान देना है, जिससे नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रावधानों को धरातल पर उतारा जा सके।
प्रशासनिक सख्ती: मुख्य सचिव की बैठक में मिले कड़े निर्देश
हाल ही में हुई मुख्य सचिव की उच्चस्तरीय बैठक में इस अभियान को लेकर कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए गए और प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त समयसीमा दी गई है। बैठक में निर्देश दिए गए हैं कि विद्यार्थियों के सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड—जैसे डिग्री, डिप्लोमा, ट्रांसक्रिप्ट और प्रमाणपत्र-को अनिवार्य रूप से अपार आईडी के साथ मैप किया जाए। छात्र-केंद्रित सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए इन सभी दस्तावेजों को नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (NAD) और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) जैसे राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किया जा रहा है।
मुख्य सचिव की बैठक के दौरान बताया गया कि, "शैक्षणिक वर्ष 2025 के सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड को जुलाई 2026 तक हर हाल में समय पर अपलोड करना सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही, सभी परीक्षाओं एवं मूल्यांकनों के लिए निर्धारित 6 महीने की समयसीमा का सख्ती से पालन करें। लंबित कार्यों की निगरानी के लिए एक मजबूत आंतरिक निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए।" इसके साथ ही अपार आईडी के साथ पूर्ण मैपिंग करते हुए सभी मार्कशीट, डिग्री और सर्टिफिकेट्स को व्यापक रूप से अपलोड करने के कार्य को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।
यह भी पढ़ें: सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुलंदशहर को दी 574 करोड़ की सौगात, जेवर एयरपोर्ट लिंक एक्सप्रेस-वे को मंजूरी