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स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को नियामक आयोग ने दी राहत

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने राज्य के बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को नियामक आयोग ने दी राहत

UPERC Orders Compensation for Delay in Power After Prepaid Recharge |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने राज्य के बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। इस आदेश के बाद स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को बैलेंस रीचार्ज के दो घंटे के अंदर यदि बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होती है तो पावर कॉर्पोरेशन को जुर्माना देना होगा।

दो घंटे में बिजली बहाल न होने पर देना होगा जुर्माना

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) के यह आदेश देते हुए कहा है कि यह व्यवस्था "स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन 2019" में शामिल है। नियामक आयोग ने आदेश दिया है कि राज्य में अब स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं की निगेटिव बैलेंस के कारण कटी बिजली यदि रिचार्ज होने के दो घंटे के भीतर बहाल नहीं होती है तो पॉवर कॉर्पोरेशन को प्रतिदिन के हिसाब से 50 रुपये मुआवजा देना होगा।

निगेटिव बैलेंस पर कटती है बिजली, 13 मार्च से सख्ती

मालूम हो कि प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था के तहत बैलेंस निगेटिव होते ही बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो जाती है। 13 मार्च से इसे अनिवार्य रूप से लागू करने की तैयारी चल रही है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि यदि बकाया राशि जमा करने के दो घंटे के भीतर बिजली चालू नहीं होती है तो उपभोक्ता मुआवजे का हकदार होगा। नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं के अधिकार स्पष्ट किए हैं और बिजली कंपनियों के लिए उनका पालन करना जरूरी है।

70 लाख उपभोक्ताओं के खातों में निगेटिव बैलेंस का दावा

उपभोक्ता परिषद के अनुसार, प्रदेश में लगभग 70 लाख स्मार्ट प्रीपेड उपभोक्ताओं के खातों में करीब 1400 करोड़ रुपये से अधिक का निगेटिव बैलेंस दिखाया जा रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के प्रभावित होने की संभावना है। परिषद ने कहा कि भुगतान के बाद निर्धारित समय में आपूर्ति बहाल न होने पर संबंधित उपभोक्ताओं को नियमों के तहत मुआवजा मिलना चाहिए।

लाखों उपभोक्ता हो चुके हैं परेशान

परिषद ने पॉवर कॉर्पोरेशन को पूर्व की घटनाओं की याद दिलाते हुए कहा कि गलत तकनीकी कमांड या सिस्टम गड़बड़ी के कारण पहले भी लाखों उपभोक्ता बिजली कटौती झेल चुके हैं। हाल ही में नोएडा और गाजियाबाद में भी घंटों बिजली बाधित रही थी। केंद्र सरकार के प्रावधानों के अनुसार ग्रामीण और शहरी सभी उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

दो घंटे में बिजली बहाल करना जरूरी

धारा रेगुलेशन-2019 की 16.11.1 के अनुसार, बकाया भुगतान या रिचार्ज के बाद बिजली आपूर्ति तुरंत बहाल करना लाइसेंसी की जिम्मेदारी है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले मामलों में यह समय सीमा अधिकतम दो घंटे तय की गई है। उपभोक्ता परिषद ने लोगों से अपील की है कि बैलेंस निगेटिव होते ही तुरंत रिचार्ज कर लें, ताकि बिजली व्यवधान और अतिरिक्त परेशानी से बचा जा सके।

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