छिंदवाड़ा। जहरीले कफ सिरप से 23 बच्चों की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। चार महीने बाद पुलिस को...
छिंदवाड़ा। जहरीले कफ सिरप से 23 बच्चों की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। चार महीने बाद पुलिस को मृत बच्चों की बिसरा (विसरा) जांच रिपोर्ट मिल गई है। रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि कफ सिरप में डाई एथिलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol) की अधिक मात्रा पाई गई थी, जिससे बच्चों की किडनी फेल हो गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
सप्लीमेंट्री चार्जशीट तैयार कर रही है पुलिस
डीएसपी जितेंद्र जाट ने बताया कि सरकारी लैब से प्राप्त रिपोर्ट में डाई एथिलीन ग्लाइकोल की अधिक मात्रा से मौत होने की पुष्टि हुई है। इस मामले में पुलिस ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट तैयार कर आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाने की बात कही है। एफआईआर के 90 दिनों के भीतर पहला प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है।
अब तक 9 आरोपियों की गिरफ्तारी
अब तक इस मामले में नौ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एक बच्चे की मौत के बाद कुंडिया पुलिस ने दो लोगों को आरोपी बनाया था। सभी आरोपी फिलहाल जिला जेल में बंद हैं।
क्या है डाई एथिलीन ग्लाइकोल?
डाई एथिलीन ग्लाइकोल एक रंगहीन, गाढ़ा और हल्की मीठी गंध वाला रसायन होता है, जो मानव शरीर के लिए बेहद घातक है। इसके सेवन से किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचता है और अधिक मात्रा में यह जानलेवा साबित होता है।
ऐसे सामने आया मामला
परासिया क्षेत्र में अगस्त और सितंबर के दौरान सर्दी, जुकाम और बुखार से पीड़ित करीब तीन दर्जन बच्चों को क्लीनिक में कफ सिरप दिया गया था। इसके सेवन के बाद परासिया के 18, जुन्नारदेव और तामिया के एक-एक तथा आमला के तीन बच्चों की मौत हो गई थी। मामले की जांच के बाद अब बिसरा रिपोर्ट में जहरीले केमिकल की पुष्टि हुई है।
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