चक्रवात 'अर्णब' के संभावित प्रभाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश में 28 से 31 अक्टूबर तक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की आशंका जताई गई है। डीएम ईशान प्रताप सिंह ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
बाराबंकी: चक्रवात 'अर्णब' के संभावित प्रभाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश में मौसम को लेकर सतर्कता बरतने की अपील की गई है। 28 से 31 अक्टूबर तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बेमौसम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार, तापमान में आठ डिग्री सेल्सियस तक गिरावट हो सकती है, जबकि हवाओं की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय ने जनसामान्य और किसानों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
खराब मौसम को लेकर डीएम की अपील
जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने जनपदवासियों और किसान भाइयों से अपील की है कि संभावित खराब मौसम को देखते हुए सतर्क रहें और अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी एहतियाती कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि आंधी-तूफान के दौरान सुरक्षित एवं पक्के भवनों में शरण लें। पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर निर्माणों के पास खड़े होने से बचें। मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा न करें और बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदानों, खेतों तथा जलाशयों के आसपास जाने से परहेज करें।
बारिश और तेज हवाओं से फसल बचाने के लिए किसानों को सलाह
जिलाधिकारी ने किसानों से विशेष रूप से कहा है कि वे अपनी फसलों और कृषि उपज को संभावित बारिश एवं तेज हवाओं से बचाने के लिए पहले से तैयारी कर लें, जिन किसानों की फसल कट चुकी है, वे उसे सुरक्षित स्थान पर रख लें। खुले में रखे अनाज और अन्य कृषि उत्पादों को भीगने से बचाने के लिए उचित ढकाव और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था करें। खेतों में खड़ी फसलों को होने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखें।
पशुओं और फसलों की सुरक्षा को दें प्राथमिकता
उन्होंने पशुपालकों को भी सलाह दी है कि वे अपने पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखें और उन्हें खुले में बांधने से बचें। खराब मौसम के दौरान बिजली गिरने और तेज हवाओं से होने वाले खतरे को गंभीरता से लें।
डीएम ने जनपदवासियों से मौसम की ताजा जानकारी के लिए आधिकारिक मौसम बुलेटिन और 'सचेत' ऐप पर जारी अलर्ट देखते रहने की अपील की है। प्रशासन का उद्देश्य समय रहते लोगों को सतर्क कर जनहानि, पशुधन और फसलों को संभावित नुकसान से बचाना है।
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