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दक्षिण चीन सागर पर घिरा चीन

दक्षिण चीन सागर पर घिरा चीन: 14 देशों और EU ने 2016 के फैसले का समर्थन, जापान पर भड़का बीजिंग

दक्षिण चीन सागर (South China Sea) के विवादित जलक्षेत्र पर बीजिंग के एकतरफा दावों के खिलाफ दुनिया की महाशक्तियां एक बार फिर एकजुट हो गई हैं।

दक्षिण चीन सागर पर घिरा चीन 14 देशों और eu ने 2016 के फैसले का समर्थन जापान पर भड़का बीजिंग

China Faces Global Pushback Over South China Sea Claims (Representative Image) |

बीजिंग (चीन)। दक्षिण चीन सागर (South China Sea) के विवादित जलक्षेत्र पर बीजिंग के एकतरफा दावों के खिलाफ दुनिया की महाशक्तियां एक बार फिर एकजुट हो गई हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जापान सहित 14 प्रमुख देशों और यूरोपीय संघ (EU) ने एक साझा मंच से 2016 के उस अंतरराष्ट्रीय ऐतिहासिक फैसले की पुष्टि की है, जिसने इस क्षेत्र में चीन के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया था। इस बहुराष्ट्रीय लामबंदी ने हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में नए कूटनीतिक और सैन्य तनाव को जन्म दे दिया है। इससे वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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इस वैश्विक लामबंदी से बौखलाए चीन ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए बीजिंग में जापान के उप-राजदूत (चीफ मिनिस्टर) को तलब किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के एशियाई मामलों के विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जापानी राजनयिक को बुलाकर इस मामले में कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और अपना कड़ा विरोध जताया। चीन ने टोक्यो पर युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देने और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का सीधा आरोप लगाया है। चीनी सरकारी मीडिया 'शिन्हुआ' ने इस राजनयिक कदम की पुष्टि की है।

यह विवाद तब और गहरा गया जब जापान और 13 अन्य देशों ने साझा बयान में द हेग (The Hague) स्थित 'स्थायी मध्यस्थता न्यायालय' (Permanent Court of Arbitration) के 2016 के फैसले को "एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर" बताया। इस फैसले ने चीन के 'नाइन-डैश लाइन' (Nine-Dash Line) के ऐतिहासिक दावों को अवैध घोषित किया था।

यूरोपीय संघ और जापानी विदेश मंत्री के कड़े तेवर

27 देशों के संगठन यूरोपीय संघ (EU) ने भी इस संबंध में एक स्वतंत्र बयान जारी किया है। यूरोपीय संघ ने 2016 के इस फैसले को विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय के रूप में पुनः दोहराया है। दूसरी ओर जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी (Toshimitsu Motegi) ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चीन द्वारा इस अंतरराष्ट्रीय फैसले को स्वीकार न करना विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांत के विपरीत है। मोतेगी ने कहा कि बीजिंग का यह अड़ियल रुख अंतरराष्ट्रीय समुदाय में 'कानून के शासन' (Rule of Law) को कमजोर करता है।

चीनी विदेश मंत्रालय ने मोतेगी के इस बयान की कड़ी निंदा की है। बीजिंग का तर्क है कि जापान दक्षिण चीन सागर विवाद में कोई पक्षकार (Party) नहीं है, इसलिए उसे चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। चीन ने इस फैसले को खारिज करते हुए इसे 'अवैध और रद्दी का टुकड़ा' (Waste paper) करार दिया है।
(यह खबर ANI से सीधे संपादित की गई है।)

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