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अमेरिकी दबाव के आगे झुके 13 देश

अमेरिकी दबाव के आगे झुके 13 देश, अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार से बनाई दूरी

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में अमेरिका के भारी कूटनीतिक दबाव के बाद कम से कम 13 देशों ने अपनी भागीदारी वापस ले ली या सीमित कर दिया है।

अमेरिकी दबाव के आगे झुके 13 देश अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार से बनाई दूरी

Tasnim Claims US Pressure Kept 13 Nations Away from Iran Funeral |

तेहरान (ईरान)। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार कार्यक्रम में अमेरिका के भारी कूटनीतिक दबाव के बाद कम से कम 13 देशों ने अपनी भागीदारी वापस ले ली या उसे बेहद सीमित कर दिया है। ईरान की न्यूज एजेंसी 'तस्नीम' ने एक वरिष्ठ सूत्र के हवाले से यह दावा किया है। यह समारोह मध्य तेहरान के इमाम खमैनी ग्रैंड मुसल्ला में आयोजित किया गया था, जिसमें कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया था।"

अमेरिकी विदेश मंत्री के गुप्त निर्देश और आर्थिक मदद रोकने की चेतावनी

तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 26 जून को सभी अमेरिकी दूतावासों और कूटनीतिक मिशनों को अत्यंत गोपनीय निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में स्पष्ट कहा गया था कि वे मेजबान देशों को ईरान के इस आयोजन से दूर रहने के लिए हर संभव कूटनीतिक दबाव और माध्यमों का उपयोग करें। निर्देश में कहा गया था कि इस समारोह में शामिल होने को एक 'अमित्रतापूर्ण कार्य' माना जाएगा, जिसके वाशिंगटन के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर विपरीत परिणाम हो सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, इस दबाव का सबसे ज्यादा असर अफ्रीका और अरब जगत पर देखा गया। दो अज्ञात अरब राजनयिकों के बयानों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने व्यक्तिगत रूप से कम से कम पांच अरब देशों के समकक्षों के साथ इस विषय पर सीधी बात की थी। वहीं, कई अफ्रीकी देशों में तैनात अमेरिकी राजदूतों ने आर्थिक मदद रोकने की चेतावनी देकर उन्हें इस समारोह से दूर रहने पर मजबूर किया।

आकलन के मुताबिक, अमेरिकी दबाव के आगे झुकने वाले इन 13 देशों में पूर्वी यूरोप के तीन देश, पांच अफ्रीकी देश, फारस की खाड़ी के दो अरब देश और पूर्वी एशिया के दो प्रमुख देश शामिल हैं। इन सभी ने या तो अपनी भागीदारी पूरी तरह वापस ले ली या फिर अपने प्रतिनिधित्व के स्तर को काफी छोटा कर दिया।

ईरान का रुख और कूटनीतिक माध्यमों से दी गई सफाई

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद कई देशों ने सीधे तौर पर अनुपस्थित रहने के बजाय कूटनीतिक रास्ते तलाशने शुरू कर दिए थे। कुछ देशों ने जेनेवा और न्यूयॉर्क में स्थित अपने राजनयिक मिशनों और मध्यस्थों के जरिए ईरान के समक्ष अपनी अनुपस्थिति को लेकर कूटनीतिक स्पष्टीकरण या औचित्य पेश करने का प्रयास किया।

वहीं, कुछ अन्य देशों ने इस विवाद से बचने के लिए समारोह में बेहद निचले स्तर के प्रतिनिधिमंडल को भेजने की कोशिश की थी। हालांकि, ईरान के वरिष्ठ सूत्र के अनुसार, ईरानी प्राधिकारियों ने ऐसे किसी भी निचले स्तर के प्रतिनिधित्व को स्वीकार करने से साफ मना कर दिया।
(यह खबर ANI से सीधे संपादित की गई है।)

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