नेपाल की अदालत ने भूटानी शरणार्थी घोटाले के हाई-प्रोफाइल मामले में दो पूर्व मंत्रियों और 21 अन्य लोगों को दोषी ठहराया है।
नेपाल: काठमांडू जिला न्यायालय ने फर्जी भूटानी शरणार्थी घोटाले में दो पूर्व मंत्रियों और 21 अन्य लोगों को दोषी ठहराया है। उन्हें राज्य के खिलाफ अपराधों का दोषी पाया गया है। न्यायालय ने पूर्व मंत्री टॉप बहादुर रायमाझी और पूर्व गृह मंत्री बाल कृष्ण खंड को इस मामले में 21 अन्य लोगों के साथ दोषी पाया है। न्यायालय के अधिकारियों ने एएनआई को इसकी पुष्टि दी है। पुलिस ने तीन साल पहले इस मामले में 30 लोगों के खिलाफ औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया था।
अमेरिका भेजने का किया झूठा वादा
फैसले के बाद जारी किए गए न्यायालय के दस्तावेजों के अनुसार, न्यायालय ने यह स्थापित किया है कि आरोपी एक ऐसी योजना में शामिल थे, जिसमें नेपाली नागरिकों को भूटानी शरणार्थी बताकर अमेरिका भेजने का झूठा वादा किया गया था। पूर्व गृह सचिव टेक नारायण पांडे और पूर्व विदेश मंत्री सुजाता कोइराला के पूर्व सहयोगी केशव प्रसाद दुलाल को भी राज्य के खिलाफ अपराधों का दोषी पाया गया है।
ये लोग पाए गए दोषी
राज्य के खिलाफ अपराधों और एकीकृत अपराधों के लिए दोषी पाए गए अन्य लोगों में सानू भंडारी, सागर राय, संदेश शर्मा, इंद्रजीत राय, गोविंद कुमार चौधरी और अंगतावा शेरपा शामिल हैं। अदालत ने शरणार्थी नेता टेक नाथ रिजाल को भी दोषी पाया। वहीं, नरेंद्र केसी, शमशेर मियां, हरिभक्त महर्जन और निरंजन कुमार खरेल को राज्य के विरुद्ध अपराधों में सह-अपराधी होने का दोषी ठहराया गया।
इन लोगों को किया गया बरी
दस्तावेज जालसाजी के आरोप में केवल टेक नाथ रिजाल, केशव प्रसाद दुलाल और सानू भंडारी को दोषी पाया गया, जबकि अन्य सभी आरोपियों को इस आरोप से बरी कर दिया गया। अदालत ने केशव प्रसाद दुलाल, सानू भंडारी, सागर राय, संदेश शर्मा, डॉ. इंद्रजीत राय, गोविंद कुमार चौधरी, अंगतावा शेरपा, टेक नारायण पांडे और टॉप बहादुर रायमाझी को संगठित अपराध के आरोप में मुख्य अपराधी घोषित किया। अगली सुनवाई में सजा का निर्धारण किया जाएगा।
224 पृष्ठों का आरोप पत्र किया था दाखिल
काठमांडू जिला लोक अभियोजक कार्यालय ने काठमांडू जिला न्यायालय में 224 पृष्ठों का आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसमें उन पर धोखाधड़ी, संगठित अपराध और राज्य के खिलाफ अपराध सहित 5 प्रकार के आरोप लगाए गए थे। इस मामले के साथ 288.4 मिलियन नेपाली रुपये की दावा राशि भी दर्ज की गई थी।
एक खोजी रिपोर्ट के बाद सुर्खियों में आया फर्जी मामला
अदालती दस्तावेज़ में पूर्व गृह मंत्री और विपक्षी सीपीएन-यूएमएल नेता टॉप बहादुर रायमाझी, नेपाली कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री बाल कृष्ण खंड, पूर्व स्पीकर अंग तवा शेरपा और पूर्व गृह सचिव टेक नारायण पांडे का नाम शामिल था। भूटानी शरणार्थी घोटाले का यह फर्जी मामला अप्रैल 2023 में नेपाल खोजी पत्रकारिता केंद्र के अनुदान से प्रकाशित एक खोजी रिपोर्ट के बाद सुर्खियों में आया। बढ़ते दबाव के बाद तत्कालीन गृह मंत्री नारायण काजी श्रेष्ठ ने पुलिस निकायों को जांच करने का निर्देश दिया।
232.5 मिलियन रुपये से अधिक की लूटी गई रकम
यह घोटाला धीरे-धीरे तब सामने आया जब पुलिस ने उपराष्ट्रपति कार्यालय के मौजूदा सचिव और पूर्व गृह सचिव टेक नारायण पांडे को गिरफ्तार किया। पांडे के पास से बरामद आंकड़ों और दस्तावेजों से घोटाले का पर्दाफाश हुआ, जिसका पहला चरण पूरा हो चुका है। जांच के दौरान पुलिस द्वारा प्राप्त आंकड़ों और दस्तावेजों से पता चला कि कैसे नेपालियों को भूटानी शरणार्थी के रूप में अमेरिका भेजने के बदले लाखों रुपये की ठगी की गई। कुल 106 पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने बताया है कि धोखेबाजों ने अलग-अलग समय पर उनसे 232.5 मिलियन रुपये से अधिक की रकम लूटी।
यह मामला तब और भी सुर्खियों में आया जब विपक्षी दल सीपीएन-यूएमएल के प्रमुख सचिव टॉप बहादुर रायमाझी, उनके बेटे संदीप और पूर्व गृह मंत्री राम बहादुर थापा के बेटे प्रतीक थापा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि सरकारी अधिकारी गिरोह के सदस्यों को गृह मंत्रालय से फर्जी दस्तावेज प्राप्त करने में मदद कर रहे थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल नेपाली नागरिकों को भूटानी शरणार्थी के रूप में अमेरिका भेजने के प्रमाण पत्र के रूप में किया जाता था।
कब शुरू की गई जांच
14 जून, 2022 को गृह मंत्रालय और नेपाल पुलिस ने धोखाधड़ी के एक मामले में शामिल एक आपराधिक गिरोह की जांच शुरू की। आरोप है कि यह गिरोह वर्षों से लोगों को भूटानी शरणार्थी के रूप में अमेरिका भेजने का वादा करके ठग रहा था। सरकार की यह कार्रवाई कुछ महीने पहले पीड़ितों द्वारा भ्रष्टाचार निवारण आयोग में गिरोह के खिलाफ दायर एक मामले के जवाब में थी। यह मामला जून 2022 में ही काठमांडू घाटी अपराध विभाग के समक्ष लाया गया, जिसके बाद जांच शुरू की गई।
875 से अधिक लोगों से लाखों रुपये की ठगी की
आरोप है कि गिरोह ने नेपाल के विभिन्न स्थानों से 875 से अधिक लोगों से लाखों रुपये की ठगी की है। पुलिस जांच में पता चला है कि संदिग्ध प्रत्येक व्यक्ति से एक से पांच मिलियन नेपाली रुपये वसूलकर उन्हें भूटानी शरणार्थी के रूप में अमेरिका भेजने का वादा कर रहा था. 1990 के बाद, भूटान सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर जातीय सफाई अभियान चलाए जाने के बाद देश से निष्कासित किए गए नेपाली भाषी भूटानी नागरिकों की भारी संख्या में नेपाल में वापसी हुई।
शरणार्थियों को मोरंग और झापा जिलों के कई शरणार्थी शिविरों में रखा गया
शरणार्थियों को मोरंग और झापा जिलों के कई शरणार्थी शिविरों में रखा गया। नेपाल और भूटान के बीच कई द्विपक्षीय वार्ताओं के विफल होने के बाद संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने शरणार्थियों को तीसरे देशों मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप में बसाना शुरू किया। 2007 से 2016 के बीच, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UNHCR) ने विश्व स्तर पर सबसे बड़े पुनर्वास कार्यक्रमों में से एक के तहत आठ देशों में 113,500 से अधिक भूटानी शरणार्थियों को बसाने में मदद की।
(ANI)
ये भी पढ़ें- होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान का तेल लाइसेंस किया रद्द