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दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका

डिजिटल क्रिएटर्स से ठगी: इंस्टाग्राम कॉपीराइट स्ट्राइक के नाम पर वसूली रैकेट, दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सक्रिय भारतीय डिजिटल क्रिएटर्स के लिए एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली खबर सामने आई है।

डिजिटल क्रिएटर्स से ठगी इंस्टाग्राम कॉपीराइट स्ट्राइक के नाम पर वसूली रैकेट दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका

Delhi High Court |

नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सक्रिय भारतीय डिजिटल क्रिएटर्स के लिए एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इंस्टाग्राम के कॉपीराइट एन्फोर्समेंट मैकेनिज्म (Copyright Enforcement Mechanism) का गलत इस्तेमाल कर भारतीय क्रिएटर्स के अकाउंट डिलीट कराने और फिर बहाली के नाम पर मोटी रकम वसूलने वाले एक बड़े 'साइबर जबरन वसूली रैकेट' (Cyber-Extortion Racket) का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। अदालत में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर इस पूरे संगठित सिंडिकेट की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की गई है।

यह याचिका नितिन जोशी नामक व्यक्ति द्वारा दायर की गई है, जो बुधवार को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजास कारिया की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। हालांकि, मामले में एक नया मोड़ तब आया जब न्यायमूर्ति तेजास कारिया ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग (Recuse) कर लिया। इसके बाद, मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने निर्देश दिया कि इस संवेदनशील मामले को 28 जुलाई 2026 को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।

SIT जांच और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग

याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि वह गृह मंत्रालय (MHA) को एक समन्वित विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दे, जो इस सीमा-पार (Cross-border) और घरेलू साइबर जबरन वसूली नेटवर्क की गहन जांच कर सके। याचिका में डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट होने से बचाने के लिए सख्त निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि, "आरोपियों के आईपी लॉग (IP Logs), क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट एड्रेस, भुगतान विवरण और अकाउंट मेटाडेटा जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल सबूतों को तुरंत सुरक्षित किया जाए, ताकि जबरन वसूली से कमाए गए धन के वित्तीय लेन-देन (Financial Trail) का पता लगाया जा सके और दोषियों को सजा दी जा सके।"

आईटी नियमों को चुनौती: बिना नोटिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

इस जनहित याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (IT Rules, 2021) के नियम 3(1)(c) और नियम 4 की वैधता को भी चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये नियम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बिना पूर्व सूचना, बिना शिकायतकर्ता की पहचान उजागर किए और बिना कॉपीराइट के मालिकाना हक की जांच किए किसी भी यूजर का अकाउंट बंद करने की खुली छूट देते हैं, जो कि असंवैधानिक है।

वैकल्पिक तौर पर, याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार को इन नियमों में संशोधन करने या एक बाध्यकारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का निर्देश देने की मांग की है। इस SOP में पूर्व सूचना, अनिवार्य मानवीय समीक्षा, शिकायतकर्ता की पहचान का खुलासा और एक फास्ट-ट्रैक काउंटर-नोटिस तंत्र जैसे सुरक्षा उपाय शामिल होने चाहिए।

मेटा (Meta) पर कसा शिकंजा: पारदर्शिता रिपोर्ट और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग

याचिका में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वह मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक (Meta Platforms Inc.) जैसी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों के लिए समय-समय पर 'पारदर्शिता रिपोर्ट' (Transparency Reports) जारी करना अनिवार्य करे। इस रिपोर्ट में बार-बार शिकायत करने वालों और कॉपीराइट टेकडाउन के वॉल्यूम का खुलासा होना चाहिए ताकि संगठित दुरुपयोग का शुरुआत में ही पता चल सके। इसके साथ ही, याचिका में कॉपीराइट स्ट्राइक से जुड़ी जबरन वसूली की शिकायतों के तुरंत और प्रभावी निपटारे के लिए एक समर्पित फास्ट-ट्रैक शिकायत निवारण तंत्र (Dedicated Fast-Track Grievance Mechanism) स्थापित करने की भी मांग की गई है।

इसके अलावा, अदालत से अंतरिम राहत के तौर पर मांग की गई है कि जब तक इस जनहित याचिका का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक मेटा को किसी भी क्रिएटर का अकाउंट बिना पूर्व सूचना और ह्यूमन रिव्यू के सस्पेंड करने से रोका जाए। जिन क्रिएटर्स के अकाउंट पहले ही सस्पेंड किए जा चुके हैं, उन्हें मानवीय समीक्षा होने तक तुरंत बहाल किया जाए। इंस्टाग्राम के ऑटोमेटेड कॉपीराइट-स्ट्राइक सिस्टम का एक 'फॉरेंसिक ऑडिट' (Forensic Audit) कराया जाए, जिससे यह साफ हो सके कि फर्जी शिकायतें कैसे जेनरेट हो रही हैं और क्या इसमें इंस्टाग्राम के भीतर या बाहर के किसी गिरोह का हाथ है।

आजीविका पर संकट: याचिकाकर्ता की दलील

याचिका में इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया है कि आज के दौर में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स करोड़ों भारतीयों की आजीविका, व्यवसाय और पेशेवर पहचान का मुख्य साधन बन चुके हैं। ऐसे में बिना किसी ठोस जांच के, मनमाने ढंग से अकाउंट बंद कर देना क्रिएटर्स को अपूरणीय वित्तीय और प्रतिष्ठित क्षति (Financial and Reputational Harm) पहुंचाता है, जो उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

याचिकाकर्ता का यह भी आरोप है कि इस संबंध में 9 जुलाई 2026 को ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय और पुलिस अधिकारियों के समक्ष विस्तृत प्रतिवेदन (Representations) प्रस्तुत किया गया था, लेकिन इस संगठित रैकेट को रोकने के लिए कोई प्रभावी संस्थागत कदम नहीं उठाया गया। अब देखना यह होगा कि 28 जुलाई को नई पीठ के सामने इस मामले में क्या रुख अपनाया जाता है।

प्रभाव विश्लेषण (Impact Analysis)

प्रश्न 1: इस जनहित याचिका (PIL) का आम इंस्टाग्राम क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: यदि दिल्ली हाई कोर्ट इस याचिका पर सकारात्मक रुख अपनाता है, तो इंस्टाग्राम (मेटा) को अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव करना होगा। अब किसी भी क्रिएटर का अकाउंट केवल बॉट या एआई जनित फर्जी कॉपीराइट स्ट्राइक के आधार पर तुरंत डिलीट नहीं किया जा सकेगा। हर स्ट्राइक पर पहले इंसानी दिमाग (Human Review) का इस्तेमाल होगा और क्रिएटर को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा, जिससे ब्लैकमेलिंग का धंधा बंद होगा।

प्रश्न 2: याचिका में आईटी नियम 2021 (IT Rules 2021) को चुनौती क्यों दी गई है?
उत्तर: वर्तमान आईटी नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को कॉपीराइट उल्लंघन की शिकायत मिलते ही कंटेंट हटाने या अकाउंट सस्पेंड करने के व्यापक अधिकार मिले हुए हैं। इसमें शिकायतकर्ता की सत्यता जांचने या यूजर को पूर्व सूचना देने का कोई सख्त नियम नहीं है। याचिका का उद्देश्य इन नियमों को यूजर-फ्रेंडली बनाना और टेक कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाना है।

प्रश्न 3: क्या क्रिप्टोकरेंसी और सीमा-पार (Cross-Border) इनवॉल्वमेंट के कारण जांच जटिल है?
उत्तर: हां, साइबर अपराधी अक्सर अपनी पहचान छिपाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स और विदेशी सर्वर्स का इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए याचिका में सीधे गृह मंत्रालय के तहत एक स्पेशल टास्क फोर्स (SIT) की मांग की गई है जो आईपी लॉग्स और फाइनेंशियल ट्रेल्स को ट्रैक कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर सके।
​(भाषांतर: Ravi Pandey | इनपुट: ANI)

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