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ओरेकल में 30 हजार कर्मचारियों की छंटनी का खतरा

टेक दिग्गज ओरेकल में 30 हजार कर्मचारियों पर छंटनी का खतरा

न्यूयॉर्क। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव से वैश्विक स्तर पर अब कंपनियों में छंटनी का दौर शुरू हो गया है।

टेक दिग्गज ओरेकल में 30 हजार कर्मचारियों पर छंटनी का खतरा

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एआई के बढ़ते असर से शुरू हुई छंटनी की लहर

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव से वैश्विक स्तर पर अब कंपनियों में छंटनी का दौर शुरू हो गया है। इसी क्रम में दुनिया की जानी-मानी टेक कंपनी Oracle करीब 30,000 कर्मचारियों की छंटनी करने की योजना बना रही है।

ओपनएआई से डील बनी बड़ी वजह

इसके पीछे मुख्य वजह ओपनएआई के साथ किया गया करीब 27 लाख करोड़ रुपये का बेहद बड़ा सौदा बताया जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो यह ओरेकल के इतिहास की सबसे बड़ी छंटनी साबित हो सकती है।

डेटा सेंटर और GPU पर भारी निवेश

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ओरेकल ने सैम ऑल्टमैन की कंपनी OpenAI के साथ साझेदारी की है, जिसकी कीमत अब उसके अपने कर्मचारियों को चुकानी पड़ सकती है। इस सौदे के तहत 2027 से शुरू होकर अगले 5 वर्षों में ओरेकल ओपनएआई के एआई मॉडल के लिए बड़े डेटा सेंटर बनाएगी।

30 लाख GPU लगाने की तैयारी

इन डेटा सेंटर्स में करीब 30 लाख ग्लोबल प्रोसेसिंग यूनिट यानी GPU लगाई जाएंगी। इस डील को पूरा करने के लिए ओरेकल को बड़े पैमाने पर खर्च में कटौती करनी होगी।

20 से 30 हजार नौकरियों पर संकट

इसी लागत कम करने के दबाव में कंपनी 20 से 30 हजार कर्मचारियों को नौकरी से हटाने पर विचार कर रही है। जानकारों के मुताबिक ओरेकल ने पिछले दो महीनों में ही 58 अरब डॉलर का कर्ज लिया है।

भारत में भी दिख सकता है असर

ओरेकल का भारत में भी बहुत बड़ा आधार है और यहां हजारों लोग इस कंपनी में काम करते हैं। ऐसे में ग्लोबल लेवल पर होने वाली इस 30,000 की छंटनी का असर भारत में भी दिखने की पूरी आशंका है।

आईटी हब्स में बढ़ी हलचल

बेंगलुरु, हैदराबाद और नोएडा जैसे शहरों में ओरेकल के दफ्तरों में हलचल तेज हो गई है। कर्मचारी भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। इससे पहले Amazon ने भी 16,000 कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया था, जिसमें सैकड़ों भारतीयों के प्रभावित होने की बात सामने आई थी। Oracle के मालिक लैरी एलिसन और OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन के बीच बढ़ती नजदीकियों का असर अब कंपनी की बैलेंस शीट पर साफ नजर आने लगा है।

AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर पानी की तरह खर्च

पिछले कुछ समय से ओरेकल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से निवेश किया है। खास तौर पर AI कंपनियों के लिए डेटा सेंटर, क्लाउड सर्वर और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में कंपनी ने भारी रकम झोंक दी।

आर्थिक दबाव हुआ साफ

हालांकि कंपनी इसे भविष्य का निवेश बता रही थी, लेकिन कुछ ही समय में इसका आर्थिक दबाव सामने आने लगा है। "जी बिजनेस" की रिपोर्ट के मुताबिक यह छंटनी किसी एक विभाग तक सीमित नहीं रहेगी। मार्केटिंग, एडवरटाइजिंग और पुराने सॉफ्टवेयर ऑपरेशंस से जुड़े कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है।

AI और क्लाउड पर फोकस

कंपनी का पूरा ध्यान अब पुराने बिजनेस मॉडल को छोड़कर केवल AI और क्लाउड सेवाओं पर शिफ्ट होने का है। हालांकि अभी तक ओरेकल की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरूनी चर्चाओं ने कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है।

सोशल मीडिया पर छलका कर्मचारियों का दर्द

कई कर्मचारी सोशल मीडिया पर इशारों-इशारों में अपनी परेशानी और अनिश्चित भविष्य को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं। "टीडी काउवेन" के अनुसार, AI की रेस में आगे रहने के लिए कंपनियां अरबों रुपये खर्च कर रही हैं। AI मॉडल चलाने के लिए महंगे GPU और भारी बिजली की जरूरत होती है, जिसके लिए ओरेकल को और अरबों डॉलर चाहिए।

कॉस्ट कटिंग का सबसे आसान रास्ता छंटनी

इतनी बड़ी रकम निवेश करने के बाद कंपनी अब खर्च कम करने के रास्ते तलाश रही है। मैनेजमेंट को लागत घटाने का सबसे आसान तरीका कर्मचारियों की संख्या कम करना लग रहा है।

हजारों परिवारों की बढ़ी चिंता

यही वजह है कि आने वाले समय में ओरेकल की यह रणनीति हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है।

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