केंद्र सरकार ने पुराने आयकर एक्ट 1961 के स्थान पर नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू करने का फैसला किया है। नया आयकर ऐक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पुराने आयकर एक्ट 1961 के स्थान पर नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू करने का फैसला किया है। नया आयकर ऐक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। आयकर विभाग ने शनिवार को नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत मसौदा नियम और फॉर्म जारी किये हैं। आयकर विभाग द्वारा जारी मसौदा आयकर नियम, 2026 और फॉर्म पर सभी हितधारकों से 22 फरवरी तक टिप्पणियां मांगी गयी हैं। इसके बाद, नए अधिनियम के तहत नियम और फॉर्म अधिसूचित किए जाएंगे।
'टैक्स ईयर' व्यवस्था से ITR फाइलिंग होगी आसान
आयकर विभाग ने यह कदम करदाताओं के लिए अनुपालन को सरल बनाने और समझने में आसानी के लिए उठाया है। नया आयकर अधिनियम एक अप्रैल से प्रभावी होगा जो आयकर अधिनियम 1961 का स्थान लेगा। इसमें सबसे बड़ा बदलाव 'असेसमेंट ईयर' और 'प्रीवियस ईयर' की जगह 'टैक्स ईयर' का इस्तेमाल होगा। अभी तक इनकम टैक्स एक्ट 1961 में इनकम कमाने का साल फाइनेंशियल ईयर (FY) कहलाता था और उस पर टैक्स का असेसमेंट अगले साल में होता था, जिसे असेसमेंट ईयर (AY) कहा जाता था। इससे आम टैक्सपेयर को ITR फाइल करने में कम कन्फ्यूजन होगा, क्योंकि इनकम कमाने वाला साल और टैक्स रिपोर्ट करने वाला साल एक ही होगा। यह बदलाव टैक्स सिस्टम को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
नए नियमों में कम होंगे नियम और फॉर्म की संख्या
वर्तमान आयकर नियम, 1962 में 511 नियम और 399 फॉर्म शामिल हैं। नए नियमों और फॉर्म में प्रस्तावित परिवर्तनों के चलते मसौदा आयकर नियम, 2026 में 333 नियम और 190 फॉर्म शामिल होंगे। नए आयकर फॉर्म को करदाताओं की सुविधा के लिए सरल बनाया गया है। सामान्य जानकारी का सभी फॉर्म में मानकीकरण किया गया है जिससे करदाताओं के अनुपालन बोझ को कम किया जा सके।
सरल भाषा और मानकीकरण से अनुपालन बोझ घटेगा
आयकर विभाग ने कहा, फॉर्म में पहले से ही कई तरह की जानकारी होगी जिससे फाइलिंग अधिक सहज और कम त्रुटिपूर्ण हो सके। फॉर्म की भाषा को भी सरल बनाया गया है ताकि परिचालन, प्रशासनिक या कानूनी अस्पष्टता से बचा जा सके। नियमों में किए गए तर्कसंगतीकरण से प्रविधानों को सरल बनाने की उम्मीद है। नांगिया ग्लोबल के पार्टनर संदीप झुनझुनवाला ने कहा कि पुरानी भत्तों की सीमा का तर्कसंगतीकरण एक महत्वपूर्ण सुधार है। नए आयकर अधिनियम के तहत एकाउंटेंट की परिभाषा में भी महत्वपूर्ण अंतर दिखाई देता है।
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