लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने नैतिक आधार पर फैसला किया है कि वे अपने खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन नोटिस के निपटारे तक हाउस की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे।
नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने नैतिक आधार पर फैसला किया है कि वे अपने खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन नोटिस के निपटारे तक हाउस की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे। यह तब हुआ जब कांग्रेस ने आज ओम बिरला के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन का नोटिस दिया।
स्पीकर ने नोटिस की समीक्षा के दिए निर्देश
सूत्रों के मुताबिक, स्पीकर ने सदन के महासचिव को उनके खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस नोटिस का रिव्यू करने और सही एक्शन लेने का निर्देश दिया है। इससे पहले, भाजपा सांसद संबित पात्रा ने तमिलनाडु के एक जज के खिलाफ पहले हुई महाभियोग की कोशिशों का हवाला देते हुए कांग्रेस की क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठाया था।
संबित पात्रा ने कांग्रेस पर बोला तीखा हमला
भाजपा सांसद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, "राहुल गांधी और कांग्रेस के नेताओं ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। इसका जवाब संसद देगी। मैं कांग्रेस और राहुल गांधी से कहना चाहता हूं कि आप इतने हक जताने वाले हो गए हैं कि आपको सदन के नियमों का पालन करना जरूरी नहीं लगता, और फिर आप कहते हैं कि आपको किसी पर भरोसा नहीं है।" भाजपा सांसद ने दीपम मामले में तमिलनाडु के एक जज के खिलाफ इंपीचमेंट मोशन लाने की कथित प्लानिंग के लिए कांग्रेस पार्टी की निंदा की।"
कांग्रेस का दावा, 118 सांसदों का समर्थन
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि, "आज दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर हमने नियम 94C के तहत लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस जमा किया है।" कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ इस अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं।
राहुल गांधी को न बोलने देने का आरोप
सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष पर खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है और कहा है कि विपक्षी दलों के नेताओं को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। सूत्रों ने यह भी बताया कि अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में स्पीकर के खिलाफ चार घटनाओं का जिक्र किया गया है, जिनमें यह आरोप भी शामिल है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने चीन के साथ वर्ष 2020 में हुए गतिरोध पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला दिया था।
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