लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र सोमवार से शुरू होगा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के साथ सत्र की शुरुआत होगी। यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना 11 फरवरी को विधानसभा में बजट पेश करेंगे।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र सोमवार से शुरू होगा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के साथ सत्र की शुरुआत होगी। यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना 11 फरवरी को विधानसभा में बजट पेश करेंगे। विपक्ष के तेवरों को देखते हुए बजट सत्र हंगामेदार होने के आसार हैं। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी वर्ष को देखते हुए योगी सरकार का ये बजट लोकलुभावन होने की उम्मीद है जो राज्य की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। योगी सरकार का बजट इस बार करीब 9 लाख करोड़ होने का अनुमान है। पिछले साल का बजट ₹8.08 लाख करोड़ था, जो उससे पहले के साल की तुलना में 9.8% अधिक था। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश करेंगे। विधानसभा का बजट सत्र 20 फरवरी तक प्रस्तावित है।
चुनावी साल में विकास-केंद्रित
वित्तमंत्री सुरेश खन्ना वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट 11 फरवरी को सदन में पेश करेंगे। चूंकि सरकार विकास, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण योजनाओं पर विशेष फोकस रख सकती है। इस बार चुनावी साल होने के कारण बजट में सामाजिक योजनाओं, किसान हित, रोजगार और महिला कल्याण योजनाओं पर ज्यादा फोकस रहने की उम्मीद है। इसके अलावा बजट में शहरी विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, युवाओं के लिए रोजगार योजनाओं, महिला सुरक्षा और कल्याण योजनाओं के साथ ही सड़क और पुल निर्माण की परियोजनाओं पर फोकस हो सकता है।
बजट खर्च पर विपक्ष हमलावर
समाजवादी पार्टी समेत पूरा विपक्ष बजट का पूरा धन उपयोग नहीं करने का आरोप लगा रहा है। बजट आंकड़ों के मुताबिक योगी सरकार चालू वित्त वर्ष में बजट का आधा से थोड़ा ज्यादा ही खर्च कर पायी है। इसे लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। तय है कि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को सदन में घेरने की कोशिश करेगी। इसके अलावा कानून व्यवस्था, यूजीसी नियम और अन्य मसलों को लेकर विपक्ष विधान सभाऔर विधान परिषद में हंगामा कर सकता है।
बजट आवंटन व खर्च में अंतर
योगी सरकार का वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पेश बजट और अनुपूरक अनुदानों को मिलाकर कुल बजट आकार ₹8,65,079.46 करोड़ रहा था। लेकिन 11 महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी सरकार ने विभागों को कुल स्वीकृत राशि का केवल 54.42% (₹4,70,835.97 करोड़) ही जारी किया है। यह दर्शाता है कि योजनाओं की घोषणा और जमीनी क्रियान्वयन के बीच अब भी बड़ा अंतर है। हालांकि वित्त विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नियमित समीक्षा बैठकों के बाद वित्त विभाग ने धनराशि का 91% धनराशि विभिन्न विभागों को अवमुक्त कर दिया है। राज्य सरकार ने सभी विभागों को वित्त वर्ष के शेष समय में पूरा बजट खर्च करने के निर्देश दिए हैं।
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