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430 करोड़ में बिका 6.7 करोड़ साल पुराना डायनासोर

6.7 करोड़ साल पुराने टी-रेक्स 'गस' ने रचा इतिहास, 5 करोड़ डॉलर में बिका दुनिया का सबसे महंगा जीवाश्म

दक्षिण डकोटा से मिले लगभग 6.7 करोड़ (67 मिलियन) वर्ष पुराने टायरानोसॉरस रेक्स (Tyrannosaurus Rex) के कंकाल 'गस' (Gus) ने इतिहास रच दिया है।

67 करोड़ साल पुराने टी-रेक्स गस ने रचा इतिहास 5 करोड़ डॉलर में बिका दुनिया का सबसे महंगा जीवाश्म

67-Million-Year-Old Dinosaur Skeleton Sold for ₹430 Cr |

न्यूयॉर्क: दक्षिण डकोटा से मिले लगभग 6.7 करोड़ (67 मिलियन) वर्ष पुराने टायरानोसॉरस रेक्स (Tyrannosaurus Rex) के कंकाल 'गस' (Gus) ने इतिहास रच दिया है। मंगलवार को न्यूयॉर्क में सोथबी (Sotheby's) की नीलामी में यह 50.13 मिलियन डॉलर (करीब 430 करोड़ रुपये) में बिका, जिससे यह नीलामी में बिकने वाला दुनिया का सबसे महंगा जीवाश्म बन गया। यह रिकॉर्ड पहले 'एपेक्स' (Apex) नामक स्टेगोसॉरस के नाम था, जिसे 2024 में 44.6 मिलियन डॉलर में खरीदा गया था।

कैसे मिला 'गस' और किसके नाम पर रखा गया नाम

इस टी-रेक्स का नाम गैरी 'गस' लिकिंग के नाम पर रखा गया, जो दक्षिण डकोटा के हार्डिंग काउंटी के पशुपालक थे। जिस जमीन पर यह जीवाश्म मिला था, उसके मालिक वही थे। वर्ष 2022 में खुदाई शुरू होने के एक साल बाद उनका निधन हो गया। सोथबी के अनुसार, गस 38 फीट लंबा और 12.5 फीट ऊंचा है। इसकी 54 इंच लंबी खोपड़ी इसे अब तक मिले सबसे बड़े टी-रेक्स नमूनों में शामिल करती है। इसके कंकाल में 183 जीवाश्म हड्डियों के अंश हैं, जिससे यह हड्डियों की संख्या के हिसाब से लगभग 61% और द्रव्यमान के आधार पर 75 से 80% तक पूर्ण माना जाता है।

हेल क्रीक फॉर्मेशन से मिला दुर्लभ जीवाश्म

अन्य कई टी-रेक्स कंकालों की तरह गस भी हेल क्रीक फॉर्मेशन से मिला है। यह प्रसिद्ध भूवैज्ञानिक क्षेत्र मोंटाना, व्योमिंग और डकोटा राज्यों तक फैला हुआ है और डायनासोर जीवाश्मों के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गिना जाता है। यहीं से 1902 में टी-रेक्स के शुरुआती कंकालों में से एक मिला था और इसी क्षेत्र से प्राप्त जीवाश्मों के आधार पर इस प्रजाति को टायरानोसॉरस रेक्स नाम दिया गया था।

अनुमान से कहीं ज्यादा लगी कीमत

नीलामी से पहले गस की अनुमानित कीमत 20 से 30 मिलियन डॉलर आंकी गई थी, लेकिन फोन पर लगी विजयी बोली ने सभी अनुमान पीछे छोड़ दिए और इसकी अंतिम कीमत 50.13 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई।

वैज्ञानिकों के लिए भी बेहद खास

गस में कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे वैज्ञानिकों और संग्रहकर्ताओं दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती हैं।

  • इसकी खोपड़ी में लगभग 82% मूल हड्डियां सुरक्षित हैं।
  • कंकाल में विशबोन (Wishbone), पूरी श्रोणि (Pelvis) और दोनों पैर जैसे दुर्लभ हिस्से मौजूद हैं।
  • सोथबी के अनुसार, अब तक मिले टी-रेक्स नमूनों में केवल एक अन्य जीवाश्म में ही दोनों पैर पूरी तरह सुरक्षित पाए गए थे।
  • इसके शरीर पर काटने के निशान और फ्रैक्चर के प्रमाण भी मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि यह डायनासोर गंभीर चोटों के बावजूद जीवित बच गया था।

'स्टैन' और 'सू' से कैसे अलग है 'गस'

हालांकि सोथबी का कहना है कि गस अब तक मिले सबसे पूर्ण टी-रेक्स जीवाश्मों में से एक है, लेकिन पूर्णता के मामले में यह 'स्टैन' (Stan) और 'सू' (Sue) से पीछे है।

  • स्टैन लगभग 70% पूर्ण था और वर्ष 2020 में 31.8 मिलियन डॉलर में नीलाम हुआ था।
  • वहीं सू, जिसे 1997 में नीलाम किया गया था, करीब 90% पूर्ण था और इसे डायनासोर जीवाश्मों के लिए पूर्णता का मानक माना जाता है।

जीवाश्मों की दुनिया में नया इतिहास

गस की रिकॉर्ड कीमत यह दिखाती है कि दुर्लभ डायनासोर जीवाश्मों के प्रति वैज्ञानिकों, संग्रहालयों और निजी संग्रहकर्ताओं की रुचि लगातार बढ़ रही है। अपनी विशाल संरचना, असाधारण संरक्षण और ऐतिहासिक महत्व के कारण 'गस' ने न केवल दुनिया का सबसे महंगा जीवाश्म बनने का रिकॉर्ड बनाया, बल्कि जीवाश्म विज्ञान के इतिहास में भी अपना नाम दर्ज करा लिया।

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