करीब 20 वर्ष पुराने लापरवाही से वाहन चलाने के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। वर्ष 2006 में थाना सिविल लाइन में दर्ज मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने आरोप
इटावा {उत्तर प्रदेश}: करीब 20 वर्ष पुराने लापरवाही से वाहन चलाने के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। वर्ष 2006 में थाना सिविल लाइन में दर्ज मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने रमेशचंद्र, निवासी दयातपुर, थाना जमुनापार, जनपद मथुरा को दोषी मानते हुए कोर्ट उठने तक की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 1,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
साक्ष्यों के आधार पर हुआ दोष सिद्ध
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटना से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के बयान अदालत के समक्ष पेश किए। सभी साक्ष्यों और तथ्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपी ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाकर कानून का उल्लंघन किया था। अपने फैसले में अदालत ने कहा कि सड़क पर लापरवाही से वाहन चलाना केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि इससे आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ती है। इसलिए ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है।
दो दशक पुराने मामले का हुआ निपटारा
फैसला सुनाए जाने के बाद आरोपी को कोर्ट उठने तक न्यायिक अभिरक्षा में रखा गया और निर्धारित अर्थदंड जमा कराने के निर्देश दिए गए। इस निर्णय के साथ लगभग 20 साल से लंबित इस मामले का न्यायिक निपटारा हो गया।
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