मऊगंज। मध्य प्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज का गडरा गांव आज भी एक साल पुरानी उस खौफनाक याद से उबर नहीं पाया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।
मऊगंज। मध्य प्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज का गडरा गांव आज भी एक साल पुरानी उस खौफनाक याद से उबर नहीं पाया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। पिछले साल होली के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद हुई 5 मौतों का असर आज भी गांव की गलियों में सन्नाटे के रूप में देखा जा सकता है।
पटाखा फूटता है तो लगता है बम फूटा
गांव के निवासी सुरेश के अनुसार, घटना को एक साल बीत जाने के बाद भी लोग दहशत के साये में जी रहे हैं। उनका कहना है कि स्थिति ऐसी है कि आज भी अगर कहीं कोई छोटा पटाखा भी फूटता है, तो ग्रामीणों को लगता है कि कोई बम फटा हो। इस डर के कारण गांव के कई परिवार अपना घर-बार छोड़कर चले गए थे और उनमें से बहुत से लोग अब तक वापस नहीं लौटे हैं।
पुलिस की कार्रवाई फिर प्रताड़ना का आरोप
ग्रामीणों का दर्द केवल उस हिंसा तक सीमित नहीं है। सुरेश ने बताया कि घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन लोगों का उस घटना से कोई लेना-देना नहीं था, उन्हें भी पुलिस उठा ले गई थी। हिरासत के दौरान लोगों को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। इसी डर और प्रताड़ना की वजह से गांव खाली हो गया था। हालांकि, पिछले एक-दो महीनों में कुछ लोग हिम्मत जुटाकर वापस आए हैं, लेकिन एक बड़ी आबादी अब भी बाहर रहने को मजबूर है।
क्या थी घटना
साल 2025 में होली के समय गडरा गांव में हिंसक झड़प हुई थी। विवाद तब बढ़ा जब एक युवक की हत्या के बाद भीड़ उग्र हो गई और पुलिस टीम पर हमला कर दिया। इस हिंसा में एक ASI (रामगोविंद गौतम) की जान चली गई थी। एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। बाद में एक ही परिवार के तीन सदस्यों (पिता और दो बच्चे) के शव संदिग्ध परिस्थितियों में घर के अंदर मिले थे।
इन कुल 5 मौतों ने गांव को पूरी तरह से वीरान हो गया था। आज भी, प्रशासनिक आश्वासनों के बावजूद, गडरा गांव के लोग सामान्य जीवन में लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
यह भी पढ़े: मप्र में रतलाम, धार, नर्मदापुरम लू
https://www.primenewsnetwork.in/state/first-heat-alert-in-mp-ratlam-dhar-narmadapuram/148963