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अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर दोषी

2020 दिल्ली दंगा मामला: आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या में ताहिर हुसैन दोषी करार

कड़कड़डूमा कोर्ट ने अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत कई आरोपियों को दोषी ठहराया। 91 गवाहों और साक्ष्यों से आरोप साबित हुए।

2020 दिल्ली दंगा मामला आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या में ताहिर हुसैन दोषी करार

Tahir Hussain Convicted in Ankit Sharma Case |

नई दिल्ली। दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन और कई सह-आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने 91 गवाहों के बयान, दस्तावेजी, चिकित्सीय, फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को संदेह से परे साबित कर दिया है।

अदालत ने बचाव पक्ष के तर्क किए खारिज

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने दयालपुर थाना में दर्ज एफआईआर पर फैसला सुनाते हुए बचाव पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ताहिर हुसैन को मनगढ़ंत जांच के जरिए झूठा फंसाया गया है। यह मामला 26 वर्षीय आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ा है, जो 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के दौरान लापता हो गए थे। अगले दिन उनका शव चांद बाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर चाकू के कई घाव पाए गए थे।

अभियोजन ने पेश किए 91 गवाह और कई अहम साक्ष्य

अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल फोन रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की संलिप्तता साबित करने का प्रयास किया। मुकदमे के दौरान मृतक के परिजनों, पुलिस अधिकारियों, डॉक्टरों, फोरेंसिक विशेषज्ञों और प्रत्यक्षदर्शियों समेत कुल 91 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

प्रत्यक्षदर्शियों ने भीड़ में ताहिर हुसैन की मौजूदगी बताई

प्रमुख गवाह आकाश और भरत ने अदालत को बताया कि उन्होंने भीड़ को अंकित शर्मा पर हमला करते देखा था और ताहिर हुसैन को घटनास्थल पर मौजूद होकर भीड़ को उकसाते हुए देखा। पुलिसकर्मियों और अन्य गवाहों ने भी अभियोजन के पक्ष का समर्थन किया। बचाव पक्ष ने दावा किया कि कई गवाहों ने अपने बयान बदले, कुछ के बयान काफी देर से दर्ज हुए और घटनाक्रम में विरोधाभास थे। साथ ही एफआईआर और जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा गया कि ताहिर हुसैन को जनभावनाओं के दबाव में बलि का बकरा बनाया गया।

अब सजा पर होगी सुनवाई

सभी साक्ष्यों की समीक्षा के बाद अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों का अपराध संदेह से परे साबित करने में सफल रहा है। अब मामले में सजा तय करने के लिए अलग से सुनवाई होगी। दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को इस फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती देने का अधिकार भी रहेगा।

(एएनआई)

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