एचआरएफपी प्रमुख नवीद वाल्टर ने UN मंच पर पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने समानता पर जोर दिया।
न्यूयॉर्क (अमेरिका)। ह्यूमन राइट्स फोकस पाकिस्तान (एचआरएफपी) के अध्यक्ष नवीद वाल्टर ने संयुक्त राष्ट्र के उच्च स्तरीय राजनीतिक मंच (एचएलपीएफ) में पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों और अन्य हाशिए पर पड़े समुदायों के अधिकारों और सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सतत विकास तभी संभव है, जब मानवाधिकारों, समानता और सामाजिक समावेश को प्राथमिकता दी जाए।
संयुक्त राष्ट्र मंच पर रखी पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की चिंता
एचआरएफपी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नवीद वाल्टर आधिकारिक निमंत्रण पर इस मंच में शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न आधिकारिक सत्रों, नीतिगत संवादों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, राजनयिक मिशनों, नागरिक समाज संगठनों तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विशेषज्ञों के साथ चर्चाओं में भाग लिया।
'किसी को पीछे न छोड़ने' के सिद्धांत पर दिया जोर
अपने संबोधन में वाल्टर ने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों और कमजोर समुदायों को सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के तहत स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि जब तक भेदभाव, धार्मिक उत्पीड़न और मानवाधिकार उल्लंघन जारी रहेंगे, तब तक 2030 सतत विकास एजेंडा के लक्ष्य पूरे नहीं किए जा सकते।
मानवाधिकार और समान भागीदारी को बताया जरूरी
वाल्टर ने कहा कि समान अधिकार, न्याय तक पहुंच, सामाजिक समावेश और निर्णय प्रक्रिया में सार्थक भागीदारी के बिना टिकाऊ और समावेशी समाज का निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि कमजोर समुदायों की सुरक्षा और अधिकारों को प्राथमिकता दी जाए। एचआरएफपी के अनुसार, 500 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी धार्मिक स्वतंत्रता को सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की प्राथमिकताओं में शामिल करने पर सहमति व्यक्त की।
अमेरिका से वैश्विक नेतृत्व जारी रखने की अपील
मंच के एक कार्यक्रम के दौरान नवीद वाल्टर ने अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर शुभकामनाएं देते हुए धार्मिक स्वतंत्रता को अमेरिकी मूल्यों की आधारशिला बताया। उन्होंने अमेरिका से पाकिस्तान सहित दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने में अपनी वैश्विक भूमिका जारी रखने का आग्रह किया।
(एएनआई)
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