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फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस ने आगाह किया

सिगरेट पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क से टैक्स कलेक्शन में गिरावट की आशंका

केन्द्र ने सिगरेट पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Additional Excise Duty) और उच्च करों का एलान किया था। केन्द्र सरकार ने पुरानी 28% GST संरचना की जगह, अब 40% GST के साथ अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया है।

सिगरेट पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क से टैक्स कलेक्शन में गिरावट की आशंका

सिगरेट पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क से टैक्स कलेक्शन में गिरावट की आशंका

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस ने आगाह किया

नई दिल्ली। 
केन्द्र सरकार द्वारा सिगरेट पर इस महीने से लागू अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के कारण टैक्स कलेक्शन में कमी के साथ ही सिगरेट के अवैध कारोबार में वृद्धि हो सकती है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस ने यह आशंका जाहिर की है। 

मालूम हो कि केन्द्र सरकार ने सिगरेट पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Additional Excise Duty) और उच्च करों का एलान किया था। केन्द्र सरकार ने पुरानी 28% GST संरचना की जगह, अब 40% GST के साथ अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और स्वास्थ्य उपकर लगाया है। बीड़ी पर यह कर 18% है। ये बढ़ी दरें 1 फरवरी 2026 से लागू हो गयी हैं। Additional Excise Duty और उच्च करों के कारण सिगरेट के दाम ₹22 से ₹55 प्रति पैक तक बढ़ गए हैं। इसे लेकर फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (FAIFA) ने आगाह किया है कि इस अत्यधिक टैक्स वृद्धि से सिगरेट का अवैध कारोबार 39% तक बढ़ सकता है, जिससे कानूनी तौर पर टैक्स कलेक्शन कम होगा और तंबाकू किसानों की आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा। 

FAIFA की रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स में बढ़ोतरी के कारण सिगरेट के दाम काफी बढ़ गए हैं, जिससे ग्राहक अवैध तंबाकू उत्पादों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे अवैध सिगरेट की खपत 46 अरब स्टिक से अधिक होने का अनुमान है। FAIFA ने कहा है कि इस कदम से एफसीवी (FCV) तंबाकू कृषि क्षेत्र में 20% तक की गिरावट आ सकती है, जिससे किसानों और इससे जुड़े मजदूरों को काफी नुकसान होगा।

एसोसिएशन का मानना है कि इस कदम से न केवल सरकार के कर राजस्व में कमी आ सकती है, बल्कि रोजगार और आजीविका पर भी व्यापक नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। कीमतों में बढ़ोतरी से अवैध सिगरेट व्यापार में उछाल आ सकता है। साथ ही, टैक्स संग्रह पर दबाव पड़ सकता है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस के अनुसार, नये टैक्स से फ्लू-क्योर वर्जीनिया (एफसीवी) फसलों की बिक्री में 20 फीसदी की कमी आने की संभावना है।

एसोसिएशन के मुताबिक, नए टैक्स से खेती और संबंधित गतिविधियों में लगभग 26 लाख मानव दिवस के रोजगार का अतिरिक्त नुकसान होगा। यह एफसीवी तंबाकू उत्पादकों, महिला सहित कृषि श्रमिकों और तंबाकू की खेती से संबंधित भंडारण, नीलामी, परिवहन और अन्य गतिविधियों में लगे श्रमिकों के लिए गंभीर झटका होगा। खासकर, जब भारत में रोजगार की स्थिति पहले से ही गंभीर संकट में है। उच्च कर दरों का संपूर्ण सिगरेट और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा। इसे बाद में बदलना मुश्किल होगा।

एसोसिएशंस के अध्यक्ष मुरली बाबू ने कहा, नया कर तंबाकू किसानों विशेष रूप से दक्षिण भारत के एफसीवी उत्पादकों को अधिक नुकसान पहुंचाता है। दंडात्मक व भेदभावपूर्ण कराधान व अवैध तंबाकू की वृद्धि से एफसीवी किसानों का तंबाकू बाजार में हिस्सा 21 से घट 10 फीसदी हो गया है।

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