उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का खुलासा किया है। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार पीएम आवास योजना के करोड़ों रुपये अपात्रों को ट्रांसफर कर दिए गए।
यूपी में अपात्रों को दिया गया पीएम आवास योजना का लाभ - सीएजी रिपोर्ट में खुलासा
1838 अपात्रों को भेजे 9.52 करोड़, 86.20 लाख साइबर अपराधियों को कर दिए ट्रांसफर
लखनऊ।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का खुलासा किया है। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार पीएम आवास योजना के करोड़ों रुपये अपात्रों को ट्रांसफर कर दिए गए। यही नहीं 159 लाभार्थियों को भेजी जानी वाली रकम साइबर अपराधियों के खातों में भेज दिए गए। सीएजीकी रिपोर्ट-2024-25 बुधवार को विधानमंडल सदन के पटल पर रखी गई।
भारत के लेखा महापरीक्षक (सीएजी) की विधानमंडल में पेश की गई रिपोर्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के क्रियान्वयन में कई खामियों पर सवाल उठाए हैं। अप्रैल 2017 से मार्च 2023 तक की लेखापरीक्षा की रिपोर्ट के अनुसार एक तरफ 1838 अपात्रों को 9.52 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी गई। वहीं दूसरी तरफ 11.35 लाख पात्र लाभार्थियों को स्थायी प्रतीक्षा सूची से बाहर कर दिया गया। सीएजी का कहना है कि लगभग 53 प्रतिशत आपत्तियां एक से छह साल बाद भी अनिस्तारित हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना में ग्रामीण विकास विभाग को मार्च 2024 तक 36.15 लाख आवास के निर्माण का लक्ष्य दिया गया था। अप्रैल 2017 से मार्च 2023 तक की लेखा परीक्षा में पाया गया कि स्वीकृत 34.71 लाख आवास में से 34.18 लाख (लगभग 98.47 प्रतिशत) का निर्माण मार्च 2024 में पूरा हो गया था। रिपोर्ट के मुताबिक 1838 अपात्र पाए गए थे। जिनको प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं देना था। इसके बावजूद इन सभी को कुल 9.52 करोड़ रुपये भेज दिए गए। दूसरी तरफ योग्य 159 लाभार्थियों के 86.20 लाख रुपये (देय किस्त) साइबर अपराधियों के खातों में चली गई जिसकी रिवकरी तक नहीं नहीं हो सकी। दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान के द्वारा वर्ष 2018-23 की समयावधि में ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 50,771 प्रशिक्षुओं का 28.70 करोड़ की. मजदूरी का भुगतान अक्तूबर 2024 तक लंबित पाया गया।
राज्य सरकार ने केंद्र को नहीं दिया विवरण
रिपोर्ट में बताया गया है कि भूमिहीन लाभार्थी के मामले में राज्य सरकार को लाभार्थी को शासकीय या सार्वजनिक भूमि सहित किसी अन्य भूमि से योजना का लाभ देना था। इसका विवरण केंद्र सरकार को उपलब्ध करवाना था लेकिन राज्य सरकार ने ये विवरण नहीं दिया। वहीं जांच में पाया गया कि जिलों में बैंकरों और अन्य ऋण देने वाली संस्थाओं ने भी ऋण देने में सहूलियत नहीं दी।
53 फीसदी का निस्तारण तक नहीं हुआ
सीएजी रिपोर्ट में सामने आया कि छह वर्षों में जो आपत्तियां आईं उनमें से 53 फीसदी का निस्तारण तक नहीं किया गया। जिम्मेदार अफसरों ने निरीक्षण तक नहीं किए। इसमें जनपद व विकास खंड स्तर के अफसरों की लापरवाही उजागर हुई।
रिपोर्ट में कहा गया कि आवासों का भौतिक सत्यापन किया गया। जिसमें पता चला कि इसमें से 77 आवास अधूरे हैं। 74 फीसदी आवासों में प्लास्टर नहीं था। 54 फीसदी आवासों में किचन व 58 फीसदी में बाथरूम तक नहीं मिला। इसके अलावा पेयजल, जल निकासी आदि की व्यवस्थाओं में तमाम खामियां मिलीं।
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