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15 दिसंबर से खरमास: क्यों रुकते हैं शुभ काम?

15 दिसंबर से खरमास की शुरुआत: एक महीने तक क्यों रुक जाते हैं सभी शुभ काम?

15 दिसंबर से खरमास लग गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते। शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक काम इस पूरे समय में वर्जित माने जाते हैं।

15 दिसंबर से खरमास की शुरुआत एक महीने तक क्यों रुक जाते हैं सभी शुभ काम

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15 दिसंबर से खरमास की शुरुआत

15 दिसंबर से खरमास लग गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते। शादी-विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक काम इस पूरे समय में वर्जित माने जाते हैं। यह समय 14 जनवरी, मकर संक्रांति तक रहेगा।

क्या है खरमास?

खरमास को मल मास भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है, तब खरमास शुरू होता है। इस दौरान सूर्य को कमजोर माना जाता है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत नहीं की जाती।

क्यों नहीं होते शुभ कार्य?

शास्त्रों में कहा गया है कि खरमास के समय किए गए शुभ कामों का पूरा फल नहीं मिलता। इसलिए इस दौरान विवाह, सगाई, नामकरण, गृह प्रवेश और नए काम की शुरुआत को टाल दिया जाता है।

शादी-विवाह पर रोक

खरमास लगते ही विवाह समारोह पूरी तरह से बंद हो जाते हैं। जिन घरों में शादियों की तैयारी होती है, वे सभी कार्यक्रम मकर संक्रांति के बाद ही रखे जाते हैं।

पूजा-पाठ का विशेष महत्व

हालांकि शुभ काम नहीं होते, लेकिन खरमास पूजा-पाठ के लिए बहुत अच्छा समय माना जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, राम नाम का जाप, दान-पुण्य और व्रत करने का विशेष महत्व है।

दान-पुण्य क्यों माना जाता है शुभ?

मान्यता है कि खरमास में किया गया दान कई गुना फल देता है। इस समय गरीबों को अन्न, कपड़े, तिल और गुड़ का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।

कब खत्म होगा खरमास?

खरमास का समापन 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन होगा। इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा और इसके साथ ही सभी मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे।

आत्मचिंतन का समय

खरमास को केवल रोक-टोक का समय नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और संयम का समय भी माना जाता है। इस एक महीने में लोग अपने जीवन, कर्म और आस्था पर ध्यान देते हैं।

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