बीमा सेक्टर में शत प्रतिशत विदेशी निवेश को मंजूरी दिये जाने से संबंधित सबका बीमा सबकी रक्षा बिल 2025 केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज मंगलवार को लोकसभा में पेश किया।
Insurance Amendment Bill introduced in Lok Sabha, will allow 100 percent foreign investment |
नई दिल्ली। बीमा सेक्टर में शत प्रतिशत विदेशी निवेश को मंजूरी दिये जाने से संबंधित "सबका बीमा सबकी रक्षा" (बीमा कानून संशोधन) बिल 2025 केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज मंगलवार को लोकसभा में पेश किया। बिल को पिछले हफ्ते केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी थी। इसका सबसे बड़ा प्रस्ताव बीमा सेक्टर में FDI की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% करना है। यह बिल इंश्योरेंस एक्ट, 1938, LIC एक्ट, 1956 और IRDAI एक्ट, 1999 में संशोधन करता है। इस बिल को सरकार के "Insurance for All by 2047" लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है।
बीमाधारकों की सुरक्षा को मजबूत करना बिल का मकसद
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिल पश करते हुए पॉलिसीधारकों की सुरक्षा और 2047 तक सबके लिए बीमा का रोडमैप पेश किया। उन्होने कहा कि यह बिल एक नहीं, बल्कि तीन बड़े कानूनों में बदलाव का प्रस्ताव रखता है। इसमें Insurance Act, 1938, LIC Act, 1956 और IRDAI Act, 1999 शामिल हैं। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उसकी दीर्घकालिक सोच, यानी 2047 तक 'सबके लिए बीमा' (Insurance for All) के लक्ष्य के अनुरूप हैं। सरकार के मुताबिक इस बिल का मकसद बीमाधारकों की सुरक्षा को मजबूत करना, ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बीमा पहुंचाना और बीमा सेक्टर की रफ्तार तेज करना है। बिल के संसद से पास होने के बाद बीमा सेक्टर में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के रास्ते खुल जाएंगे। साथ ही, इससे बीमा कंपनियों के लिए कारोबार करना भी आसान होगा।
टॉप मैनेजमेंट में से कम से कम एक अधिकारी का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य
इस बिल (Insurance Bill 2025) में बीमा कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% करने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि इससे लंबे समय के लिए विदेशी पूंजी आएगी। हालांकि, बिल में यह शर्त भी रखी गई है कि अगर कोई बीमा कंपनी पूरी तरह विदेशी स्वामित्व वाली भी हो, तो उसके टॉप मैनेजमेंट में से कम से कम एक अधिकारी (चेयरपर्सन/MD/CEO) भारतीय नागरिक होना जरूरी होगा। इसके अलावा, यह बिल नॉन-इंश्योरेंस कंपनी और इंश्योरेंस कंपनी के मर्जर का रास्ता भी खोलता है।
बिल में बढ़ाए गए हैं सरकारी बीमा कंपनी LIC के अधिकार
बिल में सरकारी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India के अधिकार बढ़ाये गये हैं। अब LIC को नए जोनल ऑफिस खोलने के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी नहीं लेनी होगी और वह विदेश में अपने ऑपरेशंस को वहां के स्थानीय कानूनों के मुताबिक री-स्ट्रक्चर कर सकेगी। इसके अलावा, पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा के लिए एक नया फंड बनाने का भी प्रावधान है।
सरकार का तर्क है कि ज्यादा विदेशी भागीदारी से भारत में बीमा की पहुंच बढ़ेगी, नई टेक्नोलॉजी, बेहतर रिस्क मैनेजमेंट और अंडरराइटिंग एक्सपर्टीज आएगी। अब तक बीमा सेक्टर में करीब ₹82,000 करोड़ का FDI आ चुका है।
गैरकानूनी तरीके से कमाए गए मुनाफे को वसूल सकेगा regulator
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन के अनुसार बिल में उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए Policyholders’ Education and Protection Fund बनाने का प्रस्ताव है। इस फंड का काम लोगों को बीमा के प्रति जागरूक करना और पॉलिसीधारकों के अधिकारों की रक्षा करना होगा। इसके अलावा बिल में, बीमा नियामक IRDAI को यह अधिकार देने की बात कही गई है कि वह गलत तरीके से कमाए गए मुनाफे को वापस ले सके। यानी अगर किसी कंपनी या बिचौलिए ने गैरकानूनी फायदा उठाया है, तो regulator उस रकम की वसूली कर सकेगा।
बीमा सेक्टर को मिलेगा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का स्पष्ट कानूनी ढांचा
बिल में बीमा सेक्टर के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का स्पष्ट कानूनी ढांचा देने का प्रस्ताव है। इसका फोकस पॉलिसीधारकों के डेटा की सुरक्षा पर रहेगा। इससे एक तरफ नई तकनीक और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा, तो दूसरी तरफ डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
बीमा एजेंट और बिचौलियों के लिए वन-टाइम रजिस्ट्रेशन का प्रावधान
बीमा एजेंटों और बिचौलियों के लिए वन-टाइम रजिस्ट्रेशन का प्रावधान लाने की बात कही गई है। इससे बार-बार रजिस्ट्रेशन की झंझट खत्म होगी और ग्राहकों को सेवाएं बिना रुकावट मिलती रहेंगी। साथ ही, बीमा कंपनियों में शेयर ट्रांसफर के लिए IRDAI की मंजूरी की सीमा को 1% से बढ़ाकर 5% करने का प्रस्ताव है, जिससे निवेश और फैसले लेना आसान होगा।
कुछ अहम सुधार शामिल नहीं किए जाने का जानकार लगा रहे आरोप
इंश्योरेंस सेक्टर के जानकार बिल में कुछ अहम सुधार शामिल नहीं किए जाने पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जैसे कॉम्पोजिट लाइसेंस, जिससे एक ही कंपनी लाइफ, हेल्थ और जनरल इंश्योरेंस साथ में कर पाती। इसके अलावा, नई बीमा कंपनियों के लिए न्यूनतम पूंजी की शर्त कम करना, एजेंटों को एक से ज्यादा कंपनियों की पॉलिसी बेचने की इजाजत, और बड़ी कंपनियों को कैप्टिव इंश्योरेंस यूनिट बनाने की अनुमति जैसे प्रस्ताव भी इसमें नहीं हैं।
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