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यूपी के बैंकों में पड़े हैं 9128 करोड़ रुपये

बैंकों में लावारिस पड़े रूपये वारिसों तक पहुंचाने का अभियान शुरु

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंको में लावारिस पड़े रूपयों को उसके कानूनी वारिसों तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया है। ये अभियान देश के 50 शहरों से शुरू किया गया है।

बैंकों में लावारिस पड़े रूपये वारिसों तक पहुंचाने का अभियान शुरु

बैंकों में लावारिस पड़े रूपये वारिसों तक पहुंचाने का अभियान शुरु

यूपी के बैंकों में पड़े 9128 करोड़ रुपये वारिसों तक पहुंचाने की मुहिम

लखनऊ।
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंको में लावारिस पड़े रूपयों को उसके कानूनी वारिसों तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया है। ये अभियान देश के 50 शहरों से शुरू किया गया है। इसके तहत यूपी में "आपकी पूंजी आपका अधिकार" अभियान की शुरूआत श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा और अलीगढ़ से हो चुकी है। 

उत्तर प्रदेश के विभिन्न बैंकों में 9128 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं जिनका का कोई दावेदार नहीं हैं। ये रकम केवल बैंकों की है। इसमें म्युचुअल फंड, डिविडेंड पेंशन और इंश्योरेंस मद में लावारिस जमा राशि शामिल नहीं है। अनुमान है कि इसे भी जोड़ दें तो लावारिस राशि 15 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकती है। अब इस राशि को उनके वारिसों तक पहुंचाने का बीड़ा बैंकों ने उठाया है। इसके तहत तीन महीने का अभियान शुरु किया गया है, जिसका नाम है "आपकी पूंजी आपका अधिकार"। इसके तहत प्रत्येक जिले में कैंप लगाकर वारिसों या परिजनों की तलाश होगी। ये जानकारी राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के संयोजक और बैंक ऑफ बड़ौदा के अंचल प्रमुख शैलेंद्र कुमार सिंह ने दी।

श्री  सिंह ने इस संबंध में एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि 10 साल तक जिन खातों में लेनदेन नहीं होता, उन्हें निष्क्रिय मान लिया जाता है और उसमें जमा राशि को रिजर्व बैंक आफ इंडिया को भेज देते हैं। बैंकों में जमा लावारिस राशि बढ़ती ही जा रही है। अकेले यूपी में 3.13 करोड़ से ज्यादा खातों में 9128 करोड़ रुपये और देशभर में 1.82 लाख करोड़ रुपयों का कोई दावेदार नहीं है। उन्होंने बताया कि इनमें से अधिकांश खाते मृतकों के, बचपन में खाता खुलवाकर भूल जाने वाले और बचत के लिहाज से चुपचाप खाते खुलवाने वाले ज्यादा है। अब ये राशि उनके वारिसों तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक जिले के नियामकों से संपर्क किया गया है और जिला अग्रणी बैंक के साथ संयुक्त कैंप लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा आरबीआई का उद्गम पोर्टल है।

एसएलबीसी संयोजक ने बताया कि केवाईसी के लिए जरूरी दस्तावेज या बायोमीट्रिक से खातों की पड़ताल कर पैसा दे दिया जाएगा। बिना नामिनी वाले खातों के लिए कानूनी प्रपत्रों की जरूरत होगी। लावारिस राशि के वारिसों की तलाश का काम देश के 50 शहरों से शुरू किया गया है। यूपी में 15 अक्तूबर से मथुरा और अलीगढ़ से इसकी शुरुआत हो चुकी है। अगले चरण में एक नवंबर से बाराबंकी, फिरोजाचाद, गोंडा, हरदोई, खीरी, कुशीनगर, मऊ, मिर्जापुर, शाहजहांपुर, सीतापुर सोनभद्र और सुल्तानपुर में अभियान चलेगा।

इस तरह अक्तूबर से दिसंबर तक प्रदेश के प्रत्येक जिले को कवर किया जाएगा। अभियान में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के सहयोग से भारतीय रिजर्व बैंक भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरबीएआई) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) भी हिस्सा ले रहे हैं। अभियान के दौरान नागरिकों को अपनी बिना दावे पाली संपत्तियों का पता लगाने, रिकार्ड अपडेट करने और दावा प्रक्रिया के बारे में मदद की जाएगी।

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