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53.5 लाख करोड़ का रोडमैप

बजट 2026-27: 53.5 लाख करोड़ का रोडमैप, कर्ज से कमाई और विकास पर खर्च

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को माघ पूर्णिमा और संत गुरु रविदास महाराज की जन्‍म जयंती पर लोकसभा में नौंवा केंद्रीय बजट पेश किया।

बजट 2026-27 535 लाख करोड़ का रोडमैप कर्ज से कमाई और विकास पर खर्च

Budget 2026-27: Spending, Taxes, Debt and Key Takeaways |

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को माघ पूर्णिमा और संत गुरु रविदास महाराज की जन्‍म जयंती पर लोकसभा में नौंवा केंद्रीय बजट पेश किया। उन्होंने संसद को बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट का आकार 53.5 लाख करोड़ रुपये है। इस बार के बजट में मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, कृषि, स्वास्थ्य और रक्षा पर विशेष जोर दिया गया है।

कमाई का सबसे बड़ा जरिया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि देश चलाने के लिए सरकार की झोली भरने में सबसे बड़ी भूमिका आज भी उधारी और टैक्स की है। अगर इसको आसान भाषा में समझे तो सरकार के एक रुपये के आय में सबसे ज्यादा 24 पैसे कर्ज और अन्य देनदारियों से आता है। कमाई का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा इनकम टैक्स है। सरकार को यहां से 21 प्रतिशत का आय होता है। वहीं, कॉरपोरेट जगत से मिलने वाले टैक्स का योगदान 15 प्रतिशत का है। आम जनता जो सामान और सेवाएं खरीदती है, उसपर लगने वाले जीएसटी (GST) से सरकार को 15 प्रतिशत की कमाई होती है। इनके अलावा सरकार फीस, डिविडेंड और ब्याज जैसे नॉन-टैक्स रेवेन्यू से 10 प्रतिशत, यूनियन एक्साइज ड्यूटी से 6 प्रतिशत और सीमा शुल्क यानी कस्टम ड्यूटी से 4 प्रतिशत की कमाई करती है। जबकि विनिवेश जैसे स्रोतों से फिलहाल महज 2 प्रतिशत तक की ही कमाई होती है।

खर्च का हिसाब: राज्यों की हिस्सेदारी और कर्ज का बोझ

वहीं, खर्च की बात करें तो सरकार के खर्चों का सबसे बड़ा हिस्सा राज्यों को जाता है। यह कुल बजट का 22 प्रतिशत है जिसे टैक्स और शुल्कों में राज्यों की हिस्सेदारी के तौर पर हस्तांतरित कर दिया जाता है। दूसरे सबसे बड़े खर्च की बात करें तो सरकार द्वारा लिए गए कर्ज पर लगने वाला ब्याज होता है। यहां सरकार की कुल कमाई का 20 प्रतिशत हिस्सा खर्च होता है। वहीं केंद्र सरकार विकास कार्यों के लिए अपनी योजनाओं पर 17 प्रतिशत और केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं पर 8 प्रतिशत राशि खर्च करती है। देश की सुरक्षा यानी डिफेंस सेक्टर के लिए सरकार ने बजट का 11 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया किया है। सरकार के खर्च की 7 प्रतिशत राशि वित्त आयोग की सिफारिशों और अन्य ट्रांसफर्स के मद में जाती है। इसके अलावा देश के जरूरतमंद तबके को दी जाने वाली सब्सिडी पर 6 प्रतिशत और अन्य प्रशासनिक खर्चों पर 7 प्रतिशत व्यय होता है। सरकारी कर्मचारियों की पेंशन के लिए भी कुल खर्च का लगभग 2 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित रखा गया है।

कुल मिलाकर बजट के इस पूरे ढांचे से स्पष्ट होता है कि सरकार का मुख्य ध्यान राज्यों के साथ तालमेल बिठाने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और जन-कल्याणकारी योजनाओं को रफ्तार देने पर है। 

क्या हुआ सस्ता

इसके अलावा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर नई पहल जैसे यूनिवर्सिटी टाउनशिप्स, कैंसर दवाओं पर छूट और टैक्स अनुपालन सरलीकरण जैसे निर्णय लिए गए हैं। इस बार के बजट में कस्टम ड्यूटी में कटौती किए जाने से मोबाइल फोन, माइक्रोवेव ओवन, ईवी बैटरी, कैंसर दवाएं (17 प्रकार), स्पोर्ट्स उपकरण, लेदर गुड्स, सोलर ग्लास सामग्री, सीफूड प्रोसेसिंग इनपुट और व्यक्तिगत आयात पर लगने वाले 20 प्रतिशत के टैक्स को घटाकर 10% किया गया है। इससे ये सामान अब सस्ते हो जाएंगे।

क्या हुआ महंगा

सरकार ने शेयर बाज़ार में F&O की ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ाने का ऐलान किया है। अब फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, ऑप्शंस ट्रेडिंग पर STT 0.125 प्रतिशत से बढ़कर 0.15 प्रतिशत से बढ़कर हो गया है। ऐसे में अब ट्रेडर्स के लिए फ़्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट में ट्रेडिंग करना पहले से और ज्यादा महंगा हो जाएगा।

सरकार ने तंबाकू उत्पादों (च्यूइंग तंबाकू, सिगरेट, पान मसाला) पर एनसीसीडी/एक्साइज बढ़ाने की घोषणा की है। इसके अलावा लग्जरी घड़ियां, आयातित शराब/स्पिरिट्स, कॉफी मशीनें, छतरी पार्ट्स, कुछ उर्वरक (पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड), रेफ्रिजरेटेड कंटेनर भी महंगे हो जाएंगे।

रक्षा बजट के लिए 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी

सरकार ने इस बार रक्षा बजट के लिए पिछले साल की तलुना में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए रिकॉर्ड ₹7.85 लाख करोड़ का आवंटन किया है। यह कुल व्यय का 14.67 प्रतिशत है। इसमें पूंजीगत खर्च के लिए ₹2.19 लाख करोड़ आवंटित किया गया है। बता दें कि इन पैसों का इस्तेमाल हथियारों और उपकरणों की खरीद के लिए किया जाता है। इसके अलावा रक्षा सेवाओं में 17.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए 3.11 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3.65 लाख करोड़ रुपये किया गया है। बता दें कि रक्षा सेवाओं में ऑपरेशन के ख़र्चे, मेंटेनेंस, ईंधन, मरम्मत और सैलरी जैसे ख़र्च शामिल होता है।

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