भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो रेट यथावत रखने का एलान किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने तीन दिनों तक चली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद शुक्रवार को फैसलों की घोषणा की।
मुंबई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो रेट यथावत रखने का एलान किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने तीन दिनों तक चली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद शुक्रवार को फैसलों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि एमपीसी ने बहुमत से रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है।
एमपीसी बैठक के बाद फैसलों की घोषणा
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को वर्ष 2026 की पहली मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की जानकारी दी। देश भर के कारोबारियों और दलाल स्ट्रीट की नजर हाल में पेश केंद्रीय बजट 2026 और भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद आरबीआई की इस बैठक पर टिकी हुई थी।
ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं
आर्थिक मामलों के जानकारों को प्रमुख ब्याज दर में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं थी। विशेषज्ञों का मानना था कि फरवरी 2025 से अब तक रिजर्व बैंक रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। फिलहाल न तो आर्थिक वृद्धि और न ही महंगाई के मोर्चे पर कोई बड़ी चिंता नजर आ रही है, इसलिए दरों में यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया गया।
2026 की पहली नीतिगत समीक्षा
यह आरबीआई की वर्ष 2026 की पहली नीतिगत समीक्षा बैठक थी, जिस पर आर्थिक जगत की निगाहें टिकी थीं। बैठक में मौद्रिक नीति समिति ने उम्मीदों के अनुरूप रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा और नीतिगत रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखने का निर्णय लिया।
अर्थव्यवस्था मजबूत, परिदृश्य सकारात्मक
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और घरेलू मुद्रास्फीति तथा विकास का परिदृश्य सकारात्मक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की मौद्रिक नीति संशोधित श्रृंखला पर आधारित नए मुद्रास्फीति आंकड़ों से निर्देशित होगी।
पिछले साल रेपो रेट में बड़ी कटौती
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में रिजर्व बैंक ने उदार रुख अपनाते हुए रेपो रेट में कुल 125 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की थी। दिसंबर 2025 में हुई अंतिम एमपीसी बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस प्वाइंट और घटाकर 5.5% से 5.25% किया गया था।
मांग और खपत को लेकर सकारात्मक संकेत
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि कॉरपोरेट प्रदर्शन में सुधार देखने को मिल रहा है और अनौपचारिक क्षेत्र में भी अच्छे परिणाम सामने आए हैं। मांग के मोर्चे पर ग्रामीण मांग स्थिर बनी हुई है, जबकि शहरी खपत में आगे और तेजी आने की उम्मीद है।
व्यापार समझौतों से निर्यात को बढ़ावा
उन्होंने बताया कि हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से आने वाले समय में निर्यात क्षेत्र को मजबूती मिलने की संभावना है।
विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी
आरबीआई गवर्नर ने अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए विकास दर के अनुमान को संशोधित कर बढ़ा दिया है। पहली तिमाही में विकास दर 6.9% और दूसरी तिमाही में 7% रहने की उम्मीद जताई गई है। वहीं, पूरे वित्त वर्ष 26 के लिए विकास अनुमान 7.4% किया गया है।
महंगाई को लेकर अनुमान
महंगाई के मोर्चे पर, चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 2.1% रहने का अनुमान लगाया गया है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मुद्रास्फीति 4% और दूसरी तिमाही में 4.2% रहने की संभावना जताई गई है। कीमती धातुओं को छोड़कर, अंतर्निहित मुद्रास्फीति दबाव फिलहाल शांत बने हुए हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत
वैश्विक हालात पर बात करते हुए गवर्नर ने बताया कि जनवरी के अंत तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 723.8 अरब डॉलर के स्वस्थ स्तर पर बना हुआ है। साथ ही चालू वित्त वर्ष में चालू खाता घाटा भी ‘मध्यम’ रहने की उम्मीद है।
एमएसएमई और डिजिटल धोखाधड़ी पर बड़े फैसले
आरबीआई ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए बिना गारंटी वाले ऋण की सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया है। इसके साथ ही डिजिटल धोखाधड़ी में नुकसान होने पर ग्राहकों को 25,000 रुपये तक मुआवजा देने के लिए जल्द एक नया फ्रेमवर्क लाया जाएगा। वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाने के लिए भी विशेष उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।
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