केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को माघ पूर्णिमा के अवसर पर लोकसभा में नौंवा केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया।
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को माघ पूर्णिमा के अवसर पर लोकसभा में नौंवा केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। कर्तव्य भवन में तैयार हुए इस पहले बजट में तीन बड़े संकल्प लिए गए हैं जिसमें- पहला आर्थिक वृद्धि को गति देना, दूसरा युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करना और तीसरा सबका साथ-सबका विकास का सपना साकार करना है।
गरीब, शोषित और वंचित समुदायों के विकास पर विशेष जोर
वित्त मंत्री ने कहा कि युवा शक्ति से संचालित इस बजट में गरीब, शोषित और वंचित समुदायों के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि देश विकसित भारत की दिशा में आत्मविश्वास से भरे कदम उठा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि दुनिया भर में जो अस्थिरता का माहौल बना है उसका प्रभाव भारत पर भी पड़ा है। इससे व्यापार और बहु-पक्षवाद को नुकसान हुआ है और संसाधनों और आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच में बाधाएं आई है। नई तकनीकें निर्माण प्रणालियों में बदलाव ला रही है, जबकि जल, ऊर्जा तथा महत्वपूर्ण खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
350 से ज्यादा सुधारों की शुरुआत
निर्मला सितरमण के मुताबिक, 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद 350 से अधिक सुधार लागू किए गए हैं। इनमें जीएसटी सरलीकरण, श्रम संहिताओं की अधिसूचना और गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का युक्तिकरण शामिल है। केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर नियमों को सरल बनाने पर काम कर रही है।
बायोफार्मा शक्ति योजना: यह योजना 10,000 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र बनाएगी। अगले पांच वर्षों में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन के लिए इको-सिस्टम तैयार होगा। तीन नए राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान खोले जाएंगे और 1000 मान्यता प्राप्त भारत क्लिनिक जांच स्थल बनाए जाएंगे।
वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम: श्रम गहन वस्त्र उद्योग के लिए पांच उपभागों वाला कार्यक्रम लाया गया है। इसमें राष्ट्रीय फाइबर योजना, वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना, राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम, टेक्स-इको पहल और समर्थ 2.0 शामिल हैं।
एमएसएमई विकास: भविष्य के चैंपियन बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई विकास निधि प्रस्तावित किया गया है।
बुनियादी ढांचे पर जोर: सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में जबरदस्त बढ़ोतरी की गई है। वित्त वर्ष 2014-15 में यह 2 लाख करोड़ रुपये था जो बीई 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। अब इसे बढ़ाकर वित्त वर्ष 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा।
नए फ्रेट कॉरिडोर: पूर्व में दानकुनी को पश्चिम के सूरत से जोड़ने वाला नया फ्रेट कॉरिडोर बनाया जाएगा। अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग शुरू करने की योजना है। इसकी शुरुआत ओडिशा में एनडब्ल्यू 5 से होगी।
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर: सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित होंगे। इसमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर शामिल है।
शहरी आर्थिक क्षेत्र: शहरी आर्थिक क्षेत्रों का मानचित्रण कर उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए प्रति सीईआर 5 हजार करोड़ रुपये का आवंटन प्रस्तावित किया गया है।
चिकित्सा पर्यटन: राज्यों को निजी क्षेत्र के सहयोग से पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित करने में सहायता देने की योजना है। इन केंद्रों में आयुष, चिकित्सा, पर्यटन और स्वास्थ्य जांच की सुविधाएं शामिल होंगी।
पशु चिकित्सा: 20,000 पशु चिकित्सा पेशेवर तैयार करने के लिए ऋण से जुड़ी पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी।
एनीमेशन और गेमिंग: इस क्षेत्र में 2030 तक 20 लाख पेशेवरों की जरूरत होगी। भारतीय रचना प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई को 15,000 उच्च माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट निर्माण लैब स्थापित करने में सहायता दी जाएगी।
छात्राओं के लिए छात्रावास: एसटीईएम संस्थानों में पढ़ने वाली लड़कियों की सुविधा के लिए हर जिले में लड़कियों के लिए एक-एक छात्रावास बनाया जाएगा।
होटल प्रबंधन: राष्ट्रीय होटल प्रबंधन और कैटरिंग प्रौद्योगिकी परिषद को अपग्रेड कर राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान बनाया जाएगा। 20 पर्यटन स्थलों में 10,000 गाइडों के कौशल उन्नयन के लिए पायलट योजना शुरू की जाएगी।
खेलो इंडिया मिशन: अगले दशक में खेल क्षेत्र को बदलने के लिए खेलो इंडिया मिशन लॉन्च होगा। इसमें प्रतिभा विकास, कोच प्रशिक्षण, खेल विज्ञान और बुनियादी ढांचा विकास आदी शामिल है।
भारत विस्तार: कृषि संसाधनों तक पहुंच के लिए वर्चुअल एकीकृत प्रणाली स्थापित किया जाएगा। यह बहुभाषीय एआई टूल किसानों को सही निर्णय लेने में मदद करेगा और उत्पादकता बढ़ाएगा।
शी मार्ट: लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए स्व-सहायता समूहों के लिए खुदरा आउटलेट स्थापित किए जाएंगे।
मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस: निमहांस-2 की स्थापना की जाएगी। वहीं, रांची और तेजपुर में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को शीर्ष क्षेत्रीय संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा।
पूर्वोदय राज्यों के विकास पर ध्यान: दुर्गापुर में एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। 5 पूर्वोदय राज्यों में 5 पर्यटन स्थल बनाए जाएंगे और 4000 ई-बसें चलाई जाएंगी। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट विकसित होगा।
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