भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार बुधवार को अपना तीसरा बजट पेश कर रही है। उप मुख्यमंत्री और...
भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार बुधवार को अपना तीसरा बजट पेश कर रही है। उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा विधानसभा में सुबह 11 बजे अपना सातवां और इस सरकार का पहला पेपरलेस (डिजिटल) बजट प्रस्तुत करेंगे।
क्या है प्राथमिकताएं?
इस बार के बजट का अनुमानित आकार लगभग 4.63 लाख करोड़ से 4.85 लाख करोड़ रुपये के बीच होने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष (4.21 लाख करोड़) की तुलना में काफी अधिक है। सरकार का दावा है कि इस बजट में राशि मौजूदा कर्ज (4 लाख 94 हजार करोड़ रुपये) से कम रहेगी, जो वित्तीय अनुशासन की ओर एक संकेत है।
बजट में 50 हजार नई सरकारी नौकरियों की घोषणा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, स्वरोजगार और औद्योगिक विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। वर्ष 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' घोषित किया गया है। इसके तहत नई फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स (खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां) स्थापित करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष योजनाओं का खाका तैयार किया गया है।
मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है जो अगले 3 वर्षों (2028 तक) के लिए एक 'रोलिंग बजट' का खाका पेश करेगा। इसमें 'विकसित मध्य प्रदेश @2047' के विजन को ध्यान में रखा गया है।
इन पर भी ध्यान
लाड़ली बहना योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए पर्याप्त फंड जारी रहने की संभावना है। साथ ही जिलों में महिला छात्रावासों के निर्माण पर जोर रहेगा। सिंचाई परियोजनाओं (जैसे केन-बेतवा लिंक) और सड़कों के जाल को और मजबूत करने के लिए भारी निवेश का प्रावधान है।
उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को देखते हुए बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बजट में विशेष राशि आवंटित की जा सकती है। यह बजट 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर आधारित बताया जा रहा है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास को केंद्र में रखा गया है।
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