सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को सरकारी कर्मचारियों के बकाए डीए के पचीस फीसदी हिस्से को 31 मार्च तक दो किस्तों में भुगतान करने के लिए कहा है।
ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से करारा धक्का
सरकारी कर्मचारियों को बकाया डीए का भुगतान करना ही होगा
कोलकाता।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार को पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को बकाया मंहगाई भत्ता (डीए) के भुगतान संबंधी मामले में सुप्रीम कोर्ट से फैसले से करारा धक्का लगा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को सरकारी कर्मचारियों के बकाए डीए के पचीस फीसदी हिस्से को 31 मार्च तक दो किस्तों में भुगतान करने के लिए कहा है। अवकाशप्राप्त सरकारी कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। बाकी बकाया डीए के पचहत्तर फीसदी हिस्से के भुगतान के समय के बारे में निर्णय के लिए अवकाशप्राप्त जज के नेतृत्व मे चार सदस्यीय कमिटी का गठन किया गया जो 15 अप्रैल तक स्वीकृत रिपोर्ट( कंप्लीएंस रिपोर्ट) सौंपेगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राज्य के तकरीबन बारह लाख परिवार खुशहाल होंगे। सरकार पर कर्मचारियों को बकाया डीए का भुगतान करने बाबत 43 हजार करोड़ रुपए का भी ज्यादा का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
जानकारों को मुताबिक पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों की यह बड़ी और ऐतिहासिक जीत है। वे पिछले दस साल से 2008 से 2019 तक के बकाए डीए के लिए संघर्ष कर रहे थे। बकाया डीए के भुगतान का मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में था और उसका फैसला सरकारी कर्मचारियों के पक्ष में नहीं हुआ। इस पर सरकारी कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट में गए।
सरकारी कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव का मुद्दा य.ग बन गया था कि सरकारी कर्मचारियों का डीए प्राप्त करने का अधिकार है या नहीं और डीए देना सरकार पर केवल सरकार की मर्जी पर निर्भर है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि सरकारी कर्मचारियों का डीए प्राप्त करने का अधिकार है और राज्य सरकार को उन्हें डीए का भुगतान करना है। सरकारी कर्मचारी एक तरफ कोर्ट में मामला लड़ रहे थे तो दूसरी तरफ लगातार आंदोलन भी कर रहे थे। कोलकाता क शहीद मिनार में पिछले कयी महीने से वे लगातार धरना दे रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से बकाए डीए के पचहत्तर हिस्से के भुगतान के समय के बारे में निर्णय लेने के लिए अवकाशप्राप्त जज इंदु मलहोत्रा के नेतृत्व में चार सदस्यीय कमिटी गठित की गई है। कमिटी में अवकाशप्राप्त जज तारकेंश्वर सिंह चौधरी, अवकाशप्राप्त जज गौतम भादुड़ी और सीएजी के एक सदस्य शामिल हैं।
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